ईमानदारी की कहानी – 3 Best short Story On Honesty In Hindi

इस पोस्ट में हम 3 ईमानदारी की कहानी पढ़ेंगे। ईमानदारी हमारे जीवन की सबसे अच्छी बात हैं। ईमानदारी,  एक व्यक्ति को स्वस्थ और सुखी बनती हैं। ईमानदार होने से मनुष्य चिंता, परेशानी, बेईमानी और जीवन के बहुत बिमारियों से रहता है। ईमानदार होने से शरीर और मन को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

कोई भी किसी के दिमाग को नहीं पढ़ सकता की उसके अंदर क्या चल रहा है, जब तक की वह यह महसूस नहीं करता की वह व्यक्ति ईमानदार है। ईमानदारी अच्छी आदत है जो सभी को ख़ुशी और शांति देता है।

1. ईमानदार शिवा 

एक गांव में माँ और बेटे रहते थे। माँ का नाम पार्वती और बेटे का नाम शिवा था शिवा जब छोटा था तो उसके पिता की मृत्यु हो गयी थी। पिता के मृत्यु के बाद शिवा और उसकी माँ एक छोटे से कमरे में रहते थे।

उसके पिताजी एक हलवाई के दुकान पर काम करते थे। जब शिवा के पिता की मृत्यु हो गयी तब दुकान के मालिक ने उसकी माँ को नौकरी दे दी। माँ की पगार से शिवा के पढ़ाई और घर के खर्चे अच्छे से चलता था। एक दिन शिवा सो रहा था , और माँ स्कूल के लिए उठा रही थी।

शिवा ने माँ की आवाज सुन कर झट से उठ गया और स्कूल के तैयारी में लग गया। माँ ने जल्दी से उसे टिफिन दिया और वह टाइम से स्कूल से चला गया।शिवा के स्कूल की छूटी 2 बजे होती थी। वह स्कूल से छूट कर हलवाई के दुकान पर जाया करता था।

दुकान के मालिक ने शिवा के घर के हालात देख कर उसे भी दुकान पर रख लिया था। शिवा हमेशा ईमानदारी से काम करता था। पार्वती हमेशा शिवा को ईमानदारी और सचाई की कहानियां सुनाया करती थी, और उसको जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमेशा सच और ईमानदारी की शिक्षा देती थी।

एक दिन दुकान के मालिक ने सोचा क्यों न इस बच्चे की परीक्षा ली जाये, फिर उसने एक बैग में कुछ पैसे रख दिए और उस बैग को शिवा को देते हुए बोला। बेटा इसमें बहुत सारे पैसे है, और तुम इस बैग को संभाल के मेरे घर में पंहुचा देना।

शिवा उस बैग को ले के जाने लगा तो रास्ते में उसने सोचा की क्यों न इसे खोल के देख लू की इसमें कितने पैसे है। पर फिर उसे अपनी माँ की कही हुई बाटे याद आ गई। और वह बैग को बिना खोले हुए सही सलामत अपने मालिक के घर पंहुचा दिया।

दूसरे दिन जब शिवा दुकान पे पूछा तो, उसके मालिक ने उसे अपने पास बुलाया और उसका पीठ थपथपाया और बोला। की तुम एक ईमानदार लड़के हो, मालिक ने शिवा के काम से खुश हो के उसे दुकान की चाभी दे कर बोला की अब से मेरी दुकान तुम सम्हालोगे।

सारांश : इस ईमानदारी की कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है की हमें हमेसा अपने माँ पिता के कहने पे ध्यान देना चाहिए। और अपना काम पूरी ईमानदारी के साथ करना चाहिए।

2. ईमानदार मछुवारा  ( ईमानदारी की कहानी )

एक शहर में विक्रम नाम का एक आदमी रहता था। उसके पास बहुत सारा पैसा था, और वह बहुत लोभी भी था। उसकी एक बहुत बड़ी दुकान थी। उसके दुकान पे जो कोई भी व्यक्ति आता था, विक्रम कैसे भी कर के उसे ठग ही लेता था।

यह उसका हमेसा का काम था की जो भी आये उसे ठग लो। उसके बेटा बहु समझाते रहते थे की पिता जी ऐसा काम मत करिये। बेईमानी के पैसे से बरकत नहीं होती है, लेकिन विक्रम किसी की भी नहीं सुनता था।

एक दिन उसने सोचा की क्यो न मैं अपना एक पहचान बनाऊ , इससे मेरा नाम और भी बड़ा हो जायेगा। तो उसने एक सोने के टुकड़े में अपनी छाप लगाकर और उसे कपड़े में मढ़ाकर शहर के चौराहे पर टंगवा दिया। आने जाने वाले व्यक्ति उस छाप को हमेशा देखते रहते थे। 

एक आदमी को गुस्सा आया और उसे उठाकर एक तालाब में फेक दिया। तालाब की एक बड़ी मछली ने उसे निगल लिया। एक दिन रामु नाम का मछुआरा ने तालाब से मछली पकड़ने गया और सबसे बड़ी वाली मछली को पकड़ लिया।

मछुआरा ने मछली का पेट फाड़ा तो देखा की विक्रम के छाप के फ्रेम है, जो की विक्रम कितने महीनो से इसे खोज रहा था। मछुआरा ईमानदार था और उसे लौटाने चला गया। विक्रम ने जब महीनो बाद अपनी छाप वाली फ्रेम देखा तो बहुत खुश हो गया और मछुआरे को शाबाशी दी।

अब उसे विश्वास हो गया की ईमानदारी का धन कही नहीं जाता है और बेईमानी से कमाया हुआ धन कभी नहीं फलता।

सारांश: इस ईमानदारी की कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है की, ईमानदारी से कमाया गया धन हमेसा हमारा साथ देता है।

3. व्यक्ति की ईमानदारी 

यह इस post की 3rd ईमानदारी की कहानी है। सालो पुरानी बात है। एक राजा थे उनका कोई संतान नहीं था। ओ संतान को लेके हमेसा चिंतित रहते थे। किसी भी काम में मन नहीं लगता था। उनको एक ही बात की चिंता रहती थी की उनके गुजर जाने के बाद उनके राज्य का देखभाल करेगा।

एक दिन राजा के एक बुद्धिमान दरबारी ने सलाह दी की राज्य की किसी व्यक्ति को राजा बना दिया जाये। फिर राजा ने राज्य में ये खबर फैला दी की राज्य को एक नए राजा की जरुरत है।

महल में एक दास था, और उसका लड़का राजा बनने योग्य था। वह भी मन ही मन में राजा बनने के सपने देखता था। जब उसे खबर के बारे में पता चला तो वह बहुत खुश हुआ। क्योकि उसे राजा बनने का मौका मिल रहा था।

ये खबर सुनते ही राजा बनाने की इच्छा लिए बहुत सारे लोग राजमहल में चले गए की ताकि वो लोग भी राजा बन सके। जब सारे लोग आ गए तब राजा ने उन सबको एक एक बीज दिए।

राजा ने बोले आज से 6 महीने बाद जो आदमी इस बीज में से निकले पौधे का सबसे सूंदर फूल लेकर मुझे देगा उसी को मैं राजा बनाऊंगा और वही इस राज्य का राजा होगा।

राजा ने  सभी लोग को एक- एक बीज गमले में  रोप कर दे दिया। अब दस के बेटे को भी उम्मीद जगी की वह भी राजा बन पायेगा।  मगर उसे बागवानी के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था, पर फिर भी उसने बड़े प्यार से गमले की देखभाल की।

3 महीने बीत गए गमले से कोई भी पौधा नहीं ऊगा, उसने माली से बात की, किसान से भी बात की कई उपाए किये लेकिन कोई भी काम न आ सका। 6 महीने भी बीत गए पर बीज से एक कोपल तक नहीं फूटी।

6 महीने बाद तये किये गए दिन पर वह निराश होकर अपने खाली गमले के साथ महल में पंहुचा तो वह देखता है की बाकि लोग के गमले में से एक से बढ़कर एक सूंदर फूल खिले थे।

वह उदास हो गया और उसका आँख आसुओ से भर गयी। राजा ने सभी लोग के गमले में खिले हुए फूल को गौर से देखा और अंत में परिणाम की घोषणा की और दास के लड़का के तरफ इशारा करते हुए कहा की यही मेरे राज्य के राजा  बनने योग्य है।

राजा ने इस रहस्य से पर्दा उठाया और कहा की जो बीज मैंने तुमलोग को दिया था वह उबले  हुए थे। उनमे से पौधा उग कर फूल का खिलना तो असंभव था पर दास के लकड़ा ने उसमे सचाई और ईमानदारी का फूल खिलाया।

इसलिए वही होगा इस राज्य का राजा दास और उसकी पत्नी बहुत प्रसन थे। कुछ समय बाद उस राजा की मृत्यु हो गयी। और दास के लड़के को राजा बनाया गया और वह अच्छे से राज्य के देखभाल करने लगा। इस प्रकार सचाई और ईमानदारी की जीत हुई।

सारांश: इस ईमानदारी की कहानी की कहानी से हमें ये शीख मिलती है की सच्चाई और ईमानदारी से बड़ी कोई दौलत नहीं होती है।

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