जीवन की तीन महत्वपूर्ण सीख : न्याय, गुप्तता, और सच्ची दोस्ती – Inspiring Story 2023

यह कहानी है जीवन की तीन महत्वपूर्ण सीख : न्याय, गुप्तता, और सच्ची दोस्ती के बारे में। बहुत पहले की बात है। एक गांव में दो दोस्त रहते थे। एक का नाम मनोज और दूसरे का नाम सरोज था। दोनों हमेशा एक दूसरे के साथ ही रहते थे। एक दिन वे एक किताब की दुकान में गए। वहां पर उन्हें एक बहुत ही पुरानी किताब दिखी।

उन्होंने उस किताब को खरीद लिया। फिर घर जाकर दोनों दोस्त उसे किताब को पढ़ने लगे। उस किताब में लिखा था की मनुष्य को अपने जीवन में तीन बातों का हमेशा याद रखना चाहिए-

जीवन की तीन महत्वपूर्ण सीख

  1. राजकीय कानून के साथ कभी कोई मजाक नहीं करना चाहिए।
  2. कभी भी नारी को चाहे वो पत्नी हो, बहन हो, माता हो या फिर कोई दोस्त हो, उसे अपनी गुप्त बातें कभी नहीं बताना चाहिए।
  3. सच्चे दोस्त पर हमेशा विश्वास करना चाहिए।

उसे किताब को पढ़कर दोनों दोस्त ने सोचा की क्यों न हम जीवन की तीन महत्वपूर्ण सीख वाली बातों की परीक्षा ले। फिर दोनों ने कही से एक बकरा को पकड़ कर लाये। फिर दोनों ने उस बकरे को अपने एक गोपी नाम के दोस्त के पास लेकर गए।

गोपी, मनोज और सरोज में बहुत पुरानी दोस्ती थी। गोपी ने दोनों से पूछा – क्या बात है भाई, आज तुम दोनों मेरे घर आए हो और इस बकरे के साथ।

मनोज ने बोला- भाई आज हमने सोचा कि हम तीनों मिलकर आज पार्टी करेंगे। गोपी ने बोला क्यों नहीं, ये तो बहुत अच्छी बात हैं। मनोज ने बोला भाई बस तुम एक चाकू ले कर आओ, मैं इस बकरे को काट देता हूँ।

गोपी ने बोला – अरे भाई तुम क्यों इतना मेहनत करते हो मैं हूँ न, मैं इसे काट दूंगा। तुम कष्ट मत करो। मनोज ने कहा – नहीं, आज इसे मैं काटूंगा भी और बनाऊंगा भी। बस तुम एक चाकू ला दो।

गोपी बोला – ठीक है अगर तुम नहीं मानते हो तो मैं भी एक चाकू लेकर आता हूं। गोपी अपने घर के अंदर गया और एक सुंदर सा चाकू लेकर आया। मनोज ने जब उस चाकू को दिखा तो उसे वह चाकू बहुत पसंद आया।

उसने गोपी से बोला – अरे वाह यह कितना शानदार चाकू है। गोपी भाई क्या यह चाकू तुम मुझे दे सकते हो। गोपी ने हंसते हुए कहा – क्या मनोज तुम भी, मांगा भी तो एक चाकू! ले लो। यह मैंने एक लोहार से विशेष रूप से बनवाया था।

लेकिन तुम लोग तो मेरे घर के अतिथि हो और हम अपने अतिथि को कभी उदास नहीं करते। और वैसे भी हमारे दोस्ती के सामने इस छोटे से चाकू का क्या मूल्य है, ले लो।

मनोज चाकू लेकर खुश हो गया। और खाना-वाना खाकर रात को लगभग बारह बजे दोनों अपने घर आ गए। मनोज एक मोटा चादर ओढ़ कर चोरो के जैसे अपने घर में घुसा और अपने पत्नी शीला को बुलाकर डरते हुए कहा – देखो मेरे से एक आदमी की हत्या हो गई हैं।

मेरे कपड़े खून से भीग गए हैं। तुम एक काम करो यह मेरा कपड़ा और चाकू एक जमीन में गाड़ दो। और गलती से भी किसी से कुछ मत कहना, वरना मुझे फांसी हो जाएगी।

शीला डर के मारे कापने लगी और डरते डरते ही बोली – ये कैसी बात कर रहे हैं मैं भला क्यों किसी को बताउंगी, आप मेरे दुश्मन थोड़े न हैं। वैसे आपने किसकी हत्या कर दी।

मनोज बोला – ठीक हैं, मैं तुम्हे बस बताता हूँ तुम किसी को मत बताना। जब मैं शाम को किसी काम से दूसरे गांव जा रहा था तो रास्ते में मुझे एक यात्री मिला। वो भी उसी गांव में जा रहा था।

किसी बात पर हम दिनों में बहस हो गया और मुझे गुस्सा आ गया और गुस्से में ही मेरे से उसकी हत्या हो गई। शीला ये सब बातें सुनकर बहुत डर गई। फिर मनोज को पहनने के लिए दूसरा कपड़ा दी।

जबतक मनोज कपड़ा बदल रहा था तबतक शीला पीछे वाले खेत में जाकर उसके खून वाले कपड़े और चाकू को जमीन में गाड़ दी। फिर मनोज और शिला सो गए। (जीवन की तीन महत्वपूर्ण सीख)

अगले दिन सुबह मनोज सो कर उठा और शीला से किसी काम का बहाना करके दूसरे गांव चला गया। शीला उस दिन बहुत बेचैन और चिंता में थी। बेचैनी से उसके आँख में बार बार आंसू आ रहे थे।

शाम तक तो वह चिंता से लड़ती रही लेकिन जब उससे और चिंता सहन नहीं तो उसने सरोज की पत्नी पार्वती के घर गई और उसको बहुत सारी कस्मे दी की दीदी आज जो कुछ भी मैं आपको बताउंगी आप कृपा करके किसी को मत बताना।

पार्वती बोली – ठीक हैं मैं नहीं बताउंगी पर क्या बात हैं तुम इतना रो क्यों रही हो। फिर शीला ने पार्वती से रोते हुए सारी बातें बता दी। और बोली – बहन तुम ही बताओ अब मैं क्या करू, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा हैं।

पार्वती बोली – धीरज रखो बहन! लेकिन भाई साहब ने यह सब बहुत गलत किया है। उनको ऐसा नहीं करना चाहिए था। खैर अब तो यह सब हो गया, अब तो चुप हों जाओ।

शीला फिर अपने घर वापस चली गई। रात हुई तो पार्वती ने सारी बातें सरोज को बताई। सरोज ने एक गहरी सास लेते हुए मन ही मन में बोला की किताब की पहला बात प्रमाणित हो गई।

फिर सरोज ने पार्वती से कहा – यह तो बहुत बुरा हुआ लेकिन शीला और मनोज मेरा बहुत परम मित्र हैं यह बात किसी से मत कहना, तुम्हे मेरी कसम हैं।

पार्वती बोली – कैसी बात करते हैं। क्या आप मुझे बतचलन समझते हैं। वैसे भी मैं मनोज भईया को राखी भी बांधती हूँ। मैं उनका बुरा क्यों चाहूंगी। लेकिन पार्वती भी इस रहस्य को जानकर बेचैन हो उठी उसे रात भर नींद नहीं आया।

अगले दिन पार्वती ने यह सब बात अपनी एक सहेली को बता दी। और शाम होते होते यह सब बात पूरे गांव में फ़ैल गई की मनोज ने एक आदमी की हत्या कर दिया हैं।

उस राज्य के राजा ने मनोज के पत्नी को बुलाया और उससे कड़ी आवाज में पूछताछ की। मनोज की पत्नी ने राजा के डर से सब कुछ सच-सच बता दी।(जीवन की तीन महत्वपूर्ण सीख)

फिर राजा ने जमीन में गाड़े हुए कपड़े और चाकू को निकलवाकर अपने पास रख लिया, और गांव के लोग मनोज को किसी दूसरे गांव से पकड़कर राजा के पास ले गए। मनोज जैसे ही राजा के सामने गया।

चुपचाप एक जगह पर खड़ा हो गया। राजा ने उससे पूछा कि क्या तुमने एक आदमी का हत्या की है तब मनोज ने बोला – मैं कुछ नहीं किया हूं राजा साहब मेरी पत्नी झूठ बोल रही है। मनोज के हजार बार कहने पर भी राजा ना उसकी बातें नहीं सुनी।

फिर थोड़ी देर बाद राजा ने कहा – तुम जो कुछ भी कह रहे हो, अगर तुम इस बात को कल तक सही साबित कर दोगे की तुमने किसी की भी हत्या नहीं की हैं। तो मैं तुम्हें माफ कर दूंगा, और अगर तुम इस बात का सही साबित नहीं किये तो मैं तुम्हें फांसी की सजा दूंगा।

मनोज वहाँ से चुपचाप चल दिया और सीधे गोपी के घर गया जहां उस रात पार्टी किए थे। लेकिन गोपी किसी काम से दूसरे गांव गया हुआ था। जब मनोज ने गोपी की पत्नी से पूछा कि गोपी कब आएगा तब उसकी पत्नी बोली – भाई साहब वो तो दो-चार दिन तक तो नहीं आने वाले हैं।

फिर मनोज ने पूछा कि क्या आप मुझे बता सकती हैं की गोपी कौन से गांव गया है। गोपी के पत्नी ने बोली – नहीं भाई साहब, वो मुझे बता कर नहीं गए।

मनोज ने बहुत व्याकुलता से गोपी को इधर-उधर ढूंढा। लेकिन उसे कहीं नहीं मिला। अब मनोज अपनी बात को सही समय पर सही साबित नहीं कर पाया तो राजा उसे फांसी की सजा सुना दिए। अगले दिन, सुबह मनोज को फांसी दे दिया गया और इधर सरोज हक्का-बक्का रह गया।

उसने मन ही मन में बोला खेल-खेल में ही मनोज को प्राणों से हाथ धोना पड़ गया। पुस्तक में लिखी हुई वह तीनो बाते प्रमाणित हो चुकी थी। लेकिन परीक्षा करने वाला हूं इस संसार को छोड़कर चला गया।

कहानी से सीख: इस कहानी ” जीवन की तीन महत्वपूर्ण सीख ” से हमें यह सिख मिलती है कि विश्वास, सत्य, और सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है। दोस्ती में विश्वास रखना, गुप्त बातें साझा नहीं करना, और न्यायपालन में सतर्क रहना हमारे जीवन में महत्वपूर्ण है।


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