स्वर्गलोक का दर्शन – swarg ka darshan best moral story in hindi 2023

स्वर्गलोक का दर्शन की कहानी

इस पोस्ट में हम स्वर्गलोक का दर्शन के बारे में एक कहानी पढ़ेंगे। एक  नदी किनारे छोटा सा एक गांव था। उस गांव में एक काशी नाम का एक लड़का रहता था। उसका एक छोटा सा परिवार था।

काशी बहुत ही शांत स्वाभाव का लड़का है। वह रोज अपनी माँ से सोने से पहले कहानी सुना करता था। माँ  भी उसे रोज अच्छी अच्छी कहानियां सुनती थी और काशी आराम से सो जाता था।

एक दिन वह माँ  से बोला की माँ आज एक बहुत अच्छी कहानी सुननी है तो माँ  ने उसे स्वर्गलोक की कहानी सुनाई। काशी को कहानी सुनकर इतना सुन्दर लगा की वह स्वर्ग देखने के लिए जिद करने लगा।

माँ  ने उसे बहुत बार समझाया की बेटा हम इंसान क्या  कोई भी  स्वर्गलोक का दर्शन कभी नहीं कर सकता।  काशी उदास होकर के रोने लगा। और रोते रोते सो गया।

काशी को एक सपना दिखाई दिया की एक चमकते हुए भगवान उसके सामने खड़े है और उससे कह रहे है की बेटा स्वर्ग देखने के लिए कुछ पैसा देना पड़ता है। तुम जब चिड़ियाघर देखने जाते हो तब पैसे देके के टिकट लेते हो न।

उसी प्रकार स्वर्ग देखने के लिए भी तुम्हे उसी प्रकार पैसे देने पड़ेंगे। काशी सपने में सोचा की मैं दादी से पैसा मांगूंगा। लेकिन भगवन के कहा स्वर्ग में तुम्हारे पैसे नहीं चलते। यहाँ तो भलाई और पुण्य कर्मो का पैसा चलता है।

भगवन ने काशी को एक डिब्बा पकड़ाते हुए बोले की इसको एक मामूली डिब्बा मत समझना , इसको अपने पास संभाल कर रखना। जब तुम कोई अच्छा काम करोगे तो एक रुपया इसमें आ जायेगा और जब तुम कोई बुरा काम करोगे तो एक रुपया इसमें से उड़ जायेगा। जब यह डिब्बा भर जायेगा तब तुम स्वर्ग देख सकोगे।

जब काशी की नींद खुली तो उसने अपने तकिया के निचे एक डिबिया देखी। डिबिया लेके वह बहुत खुश हुआ। उस दिन उसकी माँ ने एक पैसा दिया।  काशी ने पैसा लेकर बाजार चला गया।

उसने रास्ते में एक बूढ़े आदमी को देखा। वह बहुत ही फाटे पुराने कपडे पहना हुआ था और भूख के मरे बुरा हाल था। उस बूढ़े आदमी ने जब काशी को देखा तो उससे कुछ खाने के लिए मांगने लगा।

काशी ने उस आदमी को बिना पैसे दिए जाना चाहता था। इतने में उसने अपने स्कूल के एक टीचर को सामने से आते देखा। वह काशी को हमेशा से मानते थे। काशी ने जब अपने टीचर को देखा तो उस बूढ़े आदमी को पैसे दे दिया।

टीचर ने देखा की काशी एक बूढ़े आदमी की मदद कर रहा हैं तो उनको बहुत अच्छा लगा। काशी को अपने पास बुलाया और बोले की काशी तुम बहुत अच्छे लड़के हो और तुम दुसरो की मदद भी करते हो। ये सब देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा।

काशी अपने घर जाने लगा , और  रास्ते में सोचते हुए जा रहा था की उस डिबिया में एक रुपये तो आ गए होंगे। घर जाकर के डिबिया को देखा तो वह खाली पड़ी थी। काशी उदास हो गया और फिर से रोने लगा। वह रोते- रोते सो गया।

काशी फिर से सपना देखने लगा , सपने में उसे फिर से उसी  वही भगवान दिखने लगे। काशी ने भगवान से कहा – भगवान आपने कहा था की कोई पुण्य का काम करोगे तो तुम्हारे डिब्बे में एक रुपया आ जायेगा।

तो  मैंने उस आदमी की आज मदद की फिर भी रूपये नहीं आये , क्या  यह पुण्य का काम नहीं हैं।  तब भगवान बोले – तुमने अपने टीचर को देख कर उस आदमी को पैसे दिए , ताकि टीचर मेरी प्रसंशा करे। ऐसे करने से स्वर्गलोक का दर्शन कैसे होगा।

जो काम से लाभ मिलता है और उस काम को अच्छा माना जाये , वह तो व्यापर है , वह पुण्य थोड़े हैं। दूसरे दिन काशी की माँ काशी को 5 रुपये दिए। काशी ने उस पांच रुपये से 2 केले ख़रीदे।

काशी का दोस्त  सोहन काफी दिनों से बीमाए था। तो उसने सोचा की चलो आज उससे मिल लेता हु और काशी उसके घर चला गया। सोहन को देखने उसके घर एक डॉक्टर आये थे।

डॉक्टर ने कुछ दवा दिया और उसकी माँ से कहा की आज इसको कुछ फल खाने को देना। सोहन की माँ बहुत गरीब थी। वह रोने लगी, और बोली डॉक्टर साहब मैं दिनभर मजदूरी करती हु और जो कुछ धोड़ा पैसा मिलता है।

उससे हम लोग अपना पेट भरते है, इस समय बेटे की तबीयत ख़राब होने की वजह से मई कितने दिनों से काम पर भी नहीं जा रही हूँ। मेरे पास फल खरीदने के लिए एक भी पैसा नहीं है।

काशी ये सब बातें बात सुन रहा था। उसने सोहन की माँ से बोला आंटी आप टेंशन मत लो मेरे पास अभी 2 केले है आप इसको सोहन को खिला दो। सोहन की माँ थोड़ा खुश हो गयी और काशी को आशीर्वाद देने लगी।

काशी सोहन से मिल कर अपने घर चला गया। घर जाकर जब डिबिया को खोल के देखा तो उसमे 2 रूपए चमक रहे थे। एक दिन काशी अपने घर के सामने खेल रहा था। उसकी छोटी बहन वहाँ आयी और उसका कुछ खिलौने उठाने लगी।

काशी अपने बहन से बोला बहन मेरा खिलौना मत उठाओ। फिर भी उसने नहीं मानी। जब वह नहीं मानी तो काशी ने अपने बहन को थोड़ा सा  पीट दिया। उसकी बहन रोने लगी। शाम में जब अपना डिबिया खोला तो देखा की उसमे जो पहले से 2 रुपयर पड़े थे वो उड़ गए थे।

काशी समझ गया था की मैं अपने बहन को मारा, शायद इसलिए डिबिया में से पैसे उड़ गए। वह बहुत अफ़सोस किया और उसने आगे से निश्चय कर लिया की कोई बुरा काम नहीं करूँगा। मनुष्य अपने जीवन में अच्छा काम करता है तो उसका स्वभाव अच्छा हो जाता है और जब वो बुरा काम करता है तब उसका स्वभाव बुरा हो जाता है।

काशी पैसे की लोभ से अच्छा अच्छा काम करता था और लोगो की मदद भी करता था। लेकिन फिर काशी बदल गया और धीरे उसका मन अच्छा काम करने में लगने लगा। काशी की अच्छे से उसकी डिबिया पैसो से भर गया।

काशी अपनी भरी हुयी डिबिया को देखा तो बहुत खुश हो गया और उसे लेकर एक बगीचे में गया और वहाँ जाकर बैठ गया। काशी ने देखा की बगीचे में एक बूढ़ा आदमी पेड़ के निचे बैठ कर रो रहे थे काशी दौड़ता हुआ उस आदमी के पास गया और बोला – बाबा आप क्यू रो रहे हो?

उस आदमी ने बोला – बीटा जैसी डिबिया तुम्हारे पास है वैसी डिबिया मेरे पास भी था। आज सुबह स्नान करने जब नदी में गया तो वही पानी में गिर गया। कशी उस बाबा की बाते सुनी।

और बोला बाबा आप उदास मत होइए आप मेरी डिबिया ले लीजिये इसमें भी बहुत पैसे भरे पड़े है। इससे आप स्वर्गलोक का दर्शन कर लेंगे। उस बूढ़े आदमी ने बोला – बेटा तुम इसमें बड़े मेहनत  से पैसे इकट्ठे किये हो ये तुम्हारी मेहनत की कमाई हैं  इसे मैं नहीं ले सकता।

काशी बोला – बाबा मैं तो अभी जवान हूँ , अभी तो मैं ऐसी कितने डिबिया रुपये जमा कर सकता हूँ। और ये भी नहीं पता मुझे कितने दिन जीना है , आप तो बूढ़े हो गए हो । पता नहीं अब आप दूसरी डिबिया भर पाओगे की नहीं इसलिए आप मेरी डिबिया ले लो।

उस बूढ़े आदमी ने काशी की बात मान ली और उसके हाथ से ओ डिबिया ले लिया।  उस आदमी ने काशी को आशीर्वाद देने के लिए अपना हाथ उसके पीठ पर रखा तो काशी की आखे बंद हो गयी और उसे स्वर्ग दिखने लगा। उसे उसी समय ही स्वर्गलोक का दर्शन होने लगा।

इतना सुंदर स्वर्ग देख कर वो चौक गया और बहुत खुश हुआ। जब काशी ने अपनी आँखें खोली तो उस बूढ़े आदमी के जगह पर अपने सामने उस सपने वाले भगवान को देखने लगा।

भगवान  बोले  बेटा जो इंसान अच्छा काम करता हैं , उसका स्वर्ग ही घर बन जाता है। और तुमने तो अपने जीवन में बहुत अच्छे काम किये हो , अगर तुम ऐसे ही अच्छे काम करते रहोगे तो तुम्हे स्वर्ग में आने से कोई नहीं रोक सकता।

इसलिए जीवन में सबकी मदद  , भलाई करते रहोगे तो अंत में स्वर्ग में ही पहुंचोगे।  भगवान ने इतना कहकर लुप्त हो गए। और काशी हमेशा के लिए अच्छे मार्ग पर चलने लगा।

सारांश: इस स्वर्गलोक का दर्शन की कहानी से हमें यही शीख मिलती हैं की हमें अच्छा कर्म करना चाहिए। लोगो की कैसी भी परिस्थिति में मदद करनी चाहिए, और किसी से बुरा व्यव्हार  नहीं करनी चाहिए और ना ही लालच करनी चाहिए।

क्योकि ऊपर वाले सब देखते रहते है। rshindi के द्वारा सुनाई गई ये स्वर्गलोक का दर्शन की कहानी आपको लोगो को कैसी लगी हमें comment कर के जरूर बताये।

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