बेईमानी का फल – Beimani Ka Fal Best Story in Hindi 2023

कहते है की ईमान बेचकर जो बेईमान होता है। आज के दुनिया मे उसी का सम्मान होता है। हेलो दोस्तों इस पोस्ट में आज हम बेईमानी का फल (Beimani Ka Fal) के ऊपर एक कहानी पढ़ेंगे।

यदि आप बेईमानी से पैसे कमा रहे है तो जरुरी नहीं की अमीर बन जायेंगे। इस दुनिया मे अमीर से ज्यादा गरीब रहते है। अगर हम भी उन्ही मे से एक रहे तो क्या बिगड़ जायेगा।और अगर अमीर ही बनना है तो ईमानदारी से अमीर बनना चाहिए।

ऐसे एक दूसरे से छल कपट और बेईमानी से नहीं। सही तरीके से कमाया गया धन ही असली कमाई है। इंसान की पसीने की कमाई जीवन मे फलती फूलती है और बेईमानी से कमाया हुआ पानी के बुलबुले की तरह नष्ट हो जाता है।

इंसान तो पैसे के लालच से बदल जाता है अगर कुछ लोग बेईमान नहीं होते तो दुनिया मे आज इतने लोग गरीब और परेशान नहीं होते। हमें अपने जीवन मे एक बात की गाठ बांध लेनी चाहिए की बेईमानी की कमाई से शकले तो सवार सकते है लेकिन नस्ले नहीं।

कहानी – बेईमानी का फल (Beimani Ka Fal)

इस कहानी में हम देखेंगे बेईमानी का फल, Beimani Ka Fal का क्या नतीजा होता है। एक गांव मे एक बाप और बेटा रहते थे। बाप का नाम सुदामा और बेटा का नाम काशी था। काशी की माँ की बहुत पहले ही मृत्यु हो गयी थी इसलिए अब यही दोनी रहते थे।

सुदामा पूरे गांव मे सबसे ज्यादा अमीर था। वह बहुत सारे नौकर चाकर भी रखा हुआ था। वह दोनों अपनी जिंदगी बहुत ठाठ से जीते थे। किसी भी चीज की कोई कमी नहीं होती थी।

एक दिन किसी कारण से वह अपना सारा धन दौलत खो दिया और गरीब हो गया। गरीब हो जाने के कारण उसके सभी रिश्तेदार और सारे गांव वाले उसका मज़ाक उडाने लगे।

इस पर वह दुखी होकर सोचा – जिस गांव मे मै ठाठ से अपना जीवन जिया करता था जहा सभी सम्मान और इज्जत किया करते थे, वही आज मेरा मज़ाक उड़ा रहे है।

कल तक जो सगे- सम्बन्धी मेरे लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने की बाते किया करते थे, वे ही आज मुझे अपमानित करने मे कोई कमी नहीं छोड़ते है। किसी ने सच ही कहा है की इस दुनिया का सारा प्रेम और अपनापन केवल सम्पति के कारण ही प्राप्त होता है।

एक दिन काशी ने शहर जा के पैसे कमाने के बारे मे सोचा। लेकिन उसके पास एक भी रुपया नहीं था की वह शहर पहुंच सके। वह बहुत उदास हो गया।

फिर उसे याद आया की उसके पूर्वजो के द्वारा बनवाई गयी लोहे की एक बहुत विशाल तराजू रखी हुयी थी। जिसे उसने अपने वंश की आखिरी निशानी समझ कर बचा कर रखा था। काशी ने उस तराजू को अपने एक पडोशी के पास गिरवी रख दिया और शहर चला गया।

काशी को शहर जाते ही उसको एक अच्छी सी नौकरी मिल गयी और उसने मन लगाकर काम करने लगा। भाग्य ने उसका साथ भी दे दिया और एक – दो साल मे वह बहुत पैसा कमा लिया।

जब वह बहुत पैसा जमा कर लिया तो उसने अपने गांव मे ही अपना खुद का एक बिजनेस करने के लिया सोचा। और वह शहर से वापस गांव लौट आया। गांव आकर वह उस पडोसी के पास गया जिसके पास अपना तराजू गिरवी रखा था।

उसने कहा चाचा जी भगवान की कृपा से मै अपना बिजनेस शुरू करने जा रहा हूँ, अब आप अपना ब्याज आदि का हिसाब करके मेरा तराजू मुझे वापस दे दीजिये। पडोसी को विश्वास नहीं था की वह गरीब आदमी इतने कम समय मे इतना पैसा कमा सकता है।

उस पडोसी को इतना भारी तराजू को देख कर उसके मन मे लालच आ गया था। और उसे लौटाना नहीं चाह रहा था। उसने मन उदास होकर कहा बेटा काशी – तुमसे ब्याज क्या लेना तुम तो मेरे परिवार के सदस्य जैसे हो, लेकिन मै तुम्हारे सामने लज्जित हूँ।

तुम्हारी तराजू की मै रक्षा नहीं कर सका, उसे चूहों ने कुतर-कुतर कर खा  लिया। अब तो उसका एक टुकड़ा भी नहीं बचा है। काशी समझ गया की इसके मन मे बेईमानी आ गयी है।

काशी को बहुत गुस्सा आया लेकिन उसने अपने गुस्सा को दबाकर रखा और बोला – भाग्य और होनी पर किसी का वश नहीं चलता चाचा जी तराजू को चूहों ने खा गए तो इसमें आपका क्या दोष अपने तो चूहों को कहा नहीं होगा की वे उसे खा जाये।

पडोसी ने उदास होकर बोला हाँ बेटा अब कर भी क्या सकते है। काशी ने कुछ देर तक बातें करने के बाद कहा – चाचा जी रामु कहा है, मै नदी मे नहाने जा रहा हूँ उसे नदी मे नहाने मे बहुत अच्छा लगता है सोचा उसे भी साथ मे ले जाऊ।

रामु उस पडोसी का बेटा था। और वह काशी का बहुत अच्छा दोस्त भी था उस पडोसी ने अपने बेटे रामु को बुलाया और काशी के साथ नदी मे नहाने के लिए भेज दिया। काशी और रामु नदी मे नहाने के लिए चल दिए।

नहाने के बाद काशी ने रामु को एक गुफा मे छुपा दिया और उसके द्वार को एक बड़ा पथर से बंद कर दिया। और वह अपने घर की ओर चल दिया। काशी को अकेला आया देखकर पडोसी डर गया और बोला – बेटा रामु कहा है।

काशी उदास होकर बोला – चाचा जी मुझे माफ कर दीजिये,मै रामु को बचा नहीं पाया। मै नदी मे नाहा रहा था और रामु नदी के किनारे बैठा हुआ था की एक चील आयी और उसे लेकर उड़ गयी।

मै बहुत दूर तक उसके पीछे दौड़ा, लेकिन वह इतना तेज उड़ रही थी की मै उसका पीछा नहीं कर पाया। पडोसी गुस्से मे बोला – अरे ओ झूठे तूने मेरे बेटे के साथ क्या किया है। क्या चील  इतने बड़े लडके को लेकर उड़ सकती है सीधे- सीधे मेरे लडके को लौटा दे नहीं तो मै तुझे राजा से दंड दिलवाऊंगा।

काशी बोला – देखिये जो सच है मैंने आपको बता दिया अब आप राजा के पास जाना चाहते है तो जाइये मुझे कोई दिक्क़त नहीं है। दोनों राजा के दरबार मे पहुचे।

पडोसी ने सारी बाते राजा को बताया, राजा ने उसकी बात सुनकर दंग रह गए और बोले काशी – यह कैसे हो सकता है चील इतने बड़े लड़के को उठा ले जाना असंभव है। यह एक अनहोनी है ऐसा कैसे हो सकता है।

काशी बोला – महाराज आज कल आपके राज्य मे अनहोनी ही तो हो रही है इसलिए ऐसा घटनाये घाटेगी ही। जब लोहे के तराजू को चूहें खा सकते है, तो चील एक लड़का को लेकर क्यो नहीं उड़ सकती है।

राजा बोले- ये तराजू वाली क्या कहानी है। तभी काशी ने पूरी कहानी राजा को बताई। इस पर राजा ने गुस्से से बोले- बेईमानी किसी का भला नहीं करती। क्योकि जब यह एक व्यक्ति के मन मे उत्पन्न होती है तो अनेको को बेईमान बना देती है।

तुम इस बेईमान का फल मिलेगा। तभी पडोसी ने राजा से बोला महाराज मुझे माफ कर दीजिये मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी है मेरे अंदर बेईमानी का भूत सवार हो गया था, अब ऐसी गलती नहीं होंगी। राजा उसे क्षमा कर दिये और बोले –  तुम इसके तराजू लौटा तो और तुम इसके लडके को लौटा दो।

सारांश: बेईमान आदमी किसी भी हद तक जा सकता है वह इस बात पर बिल्कुल भी नहीं सोचता की वह जो कर रहा है वह सही है की नहीं इसलिए ऐसे आदमी पर विश्वाश करना बहुत बड़ी भूल होती है। rshindi.com द्वारा सुनाई गई यह Beimani Ka Fal की कहानी आपको कैसी लगी हमें comment कर के जरूर बताये।

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