भूत ने की सहायता ( Bhoot Ne Ki Sahayta ) – Best Horror Story in Hindi 2022

भूत ने की सहायता (Bhoot Ne Ki Sahayta की कहानी में, रामपुर नाम का एक गांव था। उस गांव में एक गोपी नाम का आदमी अपने परिवार के साथ रहता था। गोपी गरीब था।

उसके पास थोड़ा सा  खेत और एक गाय थी। खेत का तो कोई भरोसा नहीं था, कब बाढ़ आये और कब फसल को डूबा के लेके चले जाये। इसलिए गोपी गाय का दूध बेचकर अपना घर चलाता था।

एक दिन गोपी साईकिल से दूध बेचने जा रहा था। वो इतनी मस्ती में जा रहा था की रास्ते में पड़े बड़े बड़े पत्थर उसे दिखाई नहीं दिए, उन पत्थरो में से एक पत्थर उसकी साईकिल से टकरा जाता है और वह गिर जाता हैं। फिर उसका सारा दूध निचे गिर जाता हैं। गोपी उदास होकर घर चला जाता हैं।

भूत ने की सहायता (Bhoot Ne Ki Sahayta)

वह जब घर पहुँचता हैं तो गोपी का लड़का संदीप अपने पिताजी से पूछता हैं। पिताजी इस साईकिल को क्या हुआ, ये तो बहुत बुरी तरह से टूट गया हैं।

गोपी बोला – क्या बताऊ बेटा, दूध लेकर बाजार में बेचने जा रहा था, रास्ते में पत्थर पढ़े थे मुझे दिखाई नहीं दिया और मैं साईकिल लेकर गिर गया और ऊपर से मेरा सारा दूध भी गिर गया। आज तो किस्मत ही ख़राब हैं, पता नहीं सुबह सुबह किसका मुँह देखा था।

तभी गोपी की पत्नी भी वहाँ पर आ जाती हैं और जोर जोर से हसने लगती हैं। गोपी बोला इतना क्या हसीं आ रही है तुम्हे, देखना एक दिन इस साईकिल को ऐसा सुधार दूंगा की ये कार जैसी दौड़ेगी।

गोपी की पत्नी इस बात से सहमत हो गयी और बोली – आप ठीक बोल रहे हैं एक बार ये साईकिल कार बन जाएगी तो हमारे साथ साथ गांव वालो को भी मदद हो जाएगी।

आप बाजार जाइये और कार बनाने का सामान ले आइये। गोपी बाजार जाकर कुछ सामान लाता हैं और कार बनाने लगता है। और मदद के लिए अपने पडोसी रामु को भी बुला लेता हैं। दोनों मिलकर दिन रात मेहनत करके उस साईकिल को कार बना देते हैं ।

गोपी और रामु उस कार को देख कर बहुत ख़ुश हो जाते हैं। तभी रामु गोपी से बोलता हैं भाई हम दोनो तो कमाल कर दिए। साईकिल को कार में बदल दिए। गोपी भाई इस कार में पहले मुझे बैठने दो ना। थोड़ा मैं भी देखु की कार में बैठ कर कैसा लगता हैं।

गोपी बोला नहीं भाई! इस कार में सबसे पहले मैं जाऊंगा। तुम सब दूर से मुझे देखना। और गोपी कार को लेकर लम्बी रेस के लिए निकल जाता हैं।

गोपी जब रामु को कार में बैठाने से मना कर देता हैं तो रामु गोपी पर बहुत गुस्सा हो जाता हैं और बोलता हैं इसका बदला तो मैं तुमसे लेकर रहूँगा। और वह अपने घर चला जाता हैं। सभी गांव वाले गोपी को कार चलाते देख दंग रह जाते हैं।

एक रात सभी आराम से सो रहे होते हैं। तभी गोपी का पडोसी रामु आधी रात को गोपी के घर में चुपके से आता हैं , और गोपी के खिड़की के पास जाकर बोलता हैं – भाई आपने मेरे साथ अच्छा नहीं किया, साईकिल को कार बनाने में मैं तुम्हारा कितना मदद किया था। फिर भी तुम मुझे उसमे बैठाने से मना कर दिया।

अब गोपी भाई ये कार आपकी नहीं मेरी हैं। इसके लिए मुझे आपको मारना भी पड़े तो मैं मार दूंगा। इतना बोल कर रामु अंदर जाता हैं और गोपी को गला दबाकर मार देता हैं

रामु उसे अपने कंधे पर बैठाकर बाहर ले जाता हैं और उसे एक गांव से दूर एक कुआ में फेक देता हैं। और हसते हुए बोलता हैं – अब ये कार मेरा हुआ। (Bhoot Ne Ki Sahayta)

जिस गोपी को रामु ने कुआ में फेका था वह गोपी अब भूत बन गया था। उसे रामु के हरकतो का पता चला गया था। और उसी समय गोपी रामु के घर जाता हैं और उसे मार कर वही पंखे में लटका देता हैं।

और उसके लाश को गांव से बाहर  जंगल के झाड़ी में फेक देता हैं। गोपी का भूत अपने घर आ आता हैं। और अपने पत्नी को आवाज लगता हैं। संदीप की माँ अरे ओ संदीप की माँ उठो! तुम यहाँ आराम से सो रही हो और यहाँ मेरी पूरी दुनिया ही उजड़ गयी।

संदीप भूत को देख कर डर जाता हैं और जोर जोर से चिलाने लगता हैं। माँ बचाओ बचाओ। संदीप की माँ भूत से बोलती हैं- संदीप के पिताजी आप देख क्या रहे हैं, हमारे घर में भूत आ गया हैं बचाइये हमें। गोपी अपने पत्नी और बेटे से बोलता हैं – देखो तुमलोग डरो नहीं।

मैं संदीप के पिता गोपी हूँ और मैं मर गया हूँ और अब मरने के बाद भूत बन गया हूँ अब मैं कभी नहीं आऊंगा। संदीप और उसकी माँ जोर जोर रोने लगते हैं। और गोपी से पूछते हैं की सब कब और कैसे हो गया।

गोपी उन्हें चुप करवाता हैं और उनदोनो को सारी बातें बताता हैं फिर बोलता हैं – मैं तुम दोनों को छोड़ कर कभी यहाँ से नहीं जाऊंगा, हमेसा तुमलोग की रक्षा करूँगा। उसके बाद भूत वही रहने लगा, घर से बाहर बिलकुल भी नहीं निकलता था।

एक दिन उस गांव में आधी रात को एक बच्चे का बहुत तबियत ख़राब हो गया था उसे बहुत तेज पेट दर्द और सीने में दर्द हो रहा था सास भी लेने में दिक्क़त हो रही थी।

उसके घर वाले घबराकर रोने लगे उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था की उसे हॉस्पिटल कैसे ले जाये क्योकि उस गांव में बैलगाडी और साईकिल के अलावा कुछ भी नहीं था।

उसका घर गोपी के घर के बगल में ही था। भूत रात को रोने की आवाज सुना और उसने अपने पत्नी को उठाया और बोला – ऐसा लगता हैं की हमारे गांव में कोई परेशान हैं।

किसी के घर से रोने की आवाज आ रही हैं तुम बाहर जाकर पता करके आओ की क्या हुआ हैं। गोपी की पत्नी बाहर जाकर पता करके आती हैं और भूत को सारी बाते बताती हैं। की हमारे पडोसी संजय के लड़के का राजू की तबियत बहुत ज्यादा ख़राब हैं।

सब घबराये हुए हैं और रो रहे हैं। गांव का एक डॉक्टर आया था तो बोल रहा था की इसकी तबियत बहुत ज्यादा ख़राब होते जा रही हैं इसे जल्द से जल्द शहर के बड़े वाले हॉस्पिटल में ले जाना पड़ेगा।

समझ नहीं आ रहा हैं की क्या किया जाये। तभी भूत बोलता हैं मेरे पास एक तरकीब हैं मैं उसे अपने कार में  हॉस्पिटल लेकर जाऊंगा। तुम उसके घर जाकर जल्दी से राजू को लेकर आओ।

गोपी की पत्नी राजू और उसके माता – पिता को लेकर कार के पास आती हैं। राजू के माता – पिता उस भूत को देख कर डर जाते हैं और गुस्से में बोलते हैं – अरे संदीप की माँ तुम ये क्या करने जा रही हैं मेरे बेटे को भूत के हवाले क्यू कर रही हैं। और वो लोग इतना बोलकर उस कार में बैठने से मना कर देते है।

गोपी की पत्नी बोलती हैं – अरे कुछ नहीं होगा तुमलोग को मैं हूँ ना। भरोसा करो मेरे पर। उसकी बात मान कर सब कार में बैठ जाते हैं। भूत कार को तेज गति से चलाकर तुरंत हॉस्पिटल पंहुचा देता हैं। जब भूत ने की सहायता (Bhoot Ne Ki Sahayta) तब सभी लोग भूत को आश्चर्य  से देखते हैं। की वो एक भूत होकर कैसे मदद कर रहा रहा हैं।

गांव में वापस आकर गोपी की पत्नी अपने पति के बारे में सब बता देती हैं की भूत ही उसका पति हैं। तभी एक आदमी बोलता हैं – वही सोचु की गोपी भाई अब दूध देने क्यो नहीं आ रहे हैं।

तभी दूसरा आदमी बोलता हैं की गोपी भाई पहले भी अच्छे थे और अभी भी जब की वो भूत बन गया हैं। गोपी भाई तुमने अभी जो भी किया हैं वो वाकई शाबाशी की काबिल हैं।

सभी गांव वाले मिलकर गोपी की तारीफ ही कर रहे होते हैं की पीछे से रामु का भूत भी आ जाता हैं। और गुस्से में बोलता हैं – वो कार मेरा हैं मैं उसे बनवाने में बहुत मेहनत किया था, मैं उसे लेकर जा रहा हूँ। तभी गोपी का भूत बोलता हैं – अरे वो दुष्ट भूत ये कार मैंने बनाया हैं और ये कार गांव के भलाई के लिए हैं समझा।

फिर रामु का भूत बोला – मुझे नहीं पहचाना! मैं रामु हूँ। तुमने मुझे धोखे से मार दिया था और मैं तड़प तड़प कर मर गया, मुझे कोई बचाने तक नहीं आया था। अब तो मैं इस कार को तोड़ कर नहस तहस कर दूंगा।

ना तो ये कार तुम्हारी रहेगी और ना ही मेरी। फिर गोपी का भूत गांव वालो से कहता हैं की अगर आप कार को सही सलामत रखना चाहते हो तो मैं आप लोग से एक विनती करता हूँ इसके लाश को आग लगा दो। मैं इसका लाश  जंगल के झाड़ी में फेक दिया हूँ।  रामु का भूत बोला – नहीं नहीं ऐसा मत करना।

तभी सभी गांव वाले जाकर उसके लाश को आग लगा देते हैं और रामु हमेशा हमेशा के लिए गांव छोड़ कर भाग जाता हैं। फिर संदीप भी अपने पिताजी के मुक्ति के लिए अपने घर से घासलेट और माचिस लेकर आता हैं और कुआ में आग लगा देता हैं और गोपी को भी मुक्ति मिल जाती हैं। उसके बाद दोनों भूत गांव में कभी दिखाई नहीं दिए।


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