101+ Best Hindi Kahaniya | ज्ञानवर्धक हिंदी कहानियाँ | Hindi Kahani

हिंदी कहानियाँ ( Hindi Kahaniya ) हमारे संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन कहानियो से हमें मनोरंजन मिलता हैं, और हमारे जीवन में मूल्यवान सबक सिखाती हैं। एक सच्ची और रोचक “हिंदी कहानी ( Hindi Kahani )” के जरिए हम अधिक से अधिक ज्ञान प्राप्त करते हैं और समस्याओं का समाधान ढूँढ पाते हैं।

आमतौर पर, जब हम “हिंदी कहानियाँ ( Hindi Kahaniya ) ” सुनते हैं तो एक से बढ़कर एक प्रेरक पाठ हमारे सामने आता है। ये कहानियाँ जीवन के अलग-अलग पहलुओं को समझने में भी मदद करती हैं।

ये कहानियाँ न केवल बच्चों के लिए बल्कि हर उम्र के लोगों के लिए अनमोल हैं। कहानी, हर व्यक्ति को खुद को तलाशने और अपने जीवन में सफलता के मार्ग का पता करने का एक नया दृष्टिकोन प्रदान करती है।

जीवन में आने वाली चुनौतियों से निपटने, असफलता से भी हार न मानने, सब्र और समर्थन की महत्वा, और सफलता के पथ पर आगे बढ़ने के लिए आत्मविश्वास की प्राप्ति – ये सभी “हिंदी कहानियों ( Hindi Kahaniya)” में छुपे हैं।

आजकल इंटरनेट की दुनिया में हम “हिंदी कहानियों” को आसानी से पढ़ सकते हैं और वीडियो के रूप में भी देख सकते हैं। इससे न सिर्फ हमारे भाषा का संरक्षण होता है बल्कि हम अपनी संस्कृति और मूल्यों को भी जीवित रख सकते हैं।

हमें अपनी भाषा के प्रति गर्व महसूस होता है। इन “हिंदी कहानियों” में छिपी गहराई से हम अपने नए सोच के साथ अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। इसलिए, हमारे समय का यह उपहार है कि हम “हिंदी कहानियों” से प्रेरणा लेते हुए, अपने जीवन को खुशियों से भर दें।

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101+ Best Hindi Kahaniya

कहानी 1. ईश्वर हर जगह है ( Hindi Kahaniya )

एक गांव में एक किसान रहता था। उसका का एक बेटा था, जिसका नाम हरिदास था। किसान हर रोज रात को सोने से पहले अपने बेटे को कहानी सुनाया करता था।

एक रात जब वह अपने बेटे को कहानी सुना रहा था, तब कहानी सुनाने के बाद उसने अपने बेटे से कहा! बेटा एक बात कभी मत भूलना कि भगवान हर जगह है। किसान के बेटे ने इधर उधर देखा और पूछा पिताजी अगर भगवान हर जगह है तो वह मुझे दिखाई क्यों नहीं देते।

तब किसान ने अपने बेटे से कहा, कि बेटा हम भगवान को नहीं देख सकते मगर भगवान हर जगह हैं और हम जो भी काम करते हैं, वह भगवान देखते हैं। और उन्हीं कामों का फल हमें देते हैं।

किसान का बेटा इस बात को अच्छी तरह से याद कर लिया था। कुछ दिनों बाद उस गांव में अकाल पड़ा, और उस किसान ने अपने खेत में जो फसल उसने बोली थी, वह नहीं उगी। आलम ऐसा हो गया कि किसान खाने के लिए मोहताज हो गया।

एक रात किसान अपने बेटे को लेकर खेतों की तरफ गया, वह दूसरों के खेत से कुछ फसल चोरी करके लाना चाहता था। ताकि वह और उसका बेटा खाना खा सकें।

उसने अपने बेटे को खेत की मेड पर खड़ा कर दिया। और अपने बेटे से कहा बेटा तुम चारों तरफ देखते रहना, कोई देखें तो मुझे बता देना। जैसे ही वह किसान दूसरे की फसल काटने के लिए नीचे बैठा। उसके बेटे ने कहा पिताजी रुकिए।

उसके पिता ने कहा ! क्या हुआ कोई देख रहा है क्या ? तब उसके बेटे ने कहा हाँ पिताजी। तब किसान खेत से निकलकर मेढ़ पर आया, यह देखने के लिए, कि कौन देख रहा है। जब उसने चारों तरफ देखा तो उसे कोई भी नजर नहीं आया।

उसने अपने बेटे से कहा कौन देख रहा है, मुझे तो यहाँ पे कोई भी दिखाई नहीं दे रहा। तब किसान के बेटे ने उससे कहा पिताजी आप ही ने तो कहा था। ईश्वर हर जगह है, और वह हमारे कामों को देख रहा है।

तो क्या भगवान आपको दूसरों के खेत में फसल चोरी करते हुए नहीं देखेंगे। बेटे की मुंह से ऐसी बात सुनकर किसान बहुत शर्मिंदा हुआ। और अपने बेटे से माफी मांगते हुए, चोरी का ख्याल अपने मन से निकाल कर वापस अपने घर आ गया।

 

कहानी 2. मोची का लालच ( Hindi Kahani )

एक बहुत ही बड़ा शेठ था, उसका बहुत बड़ा मकान था। उस मकान के किनारे एक गरीब मोची अपनी छोटी सी दुकान खोल कर जूता सिलता था। मोची की एक अच्छी आदत थी की वो जब भी जूते सिलता था, भगवान के भजन जाता रहता था।

शेठ हमेशा अपने काम में व्यस्त रहता था वो कभी भी मोची के भजन पे ध्यान नहीं देता था। एक दिन अचानक से ही शेठ की तबियत ख़राब हो गई। शेठ ने अपने इलाज के लिए बहुत बड़े बड़े डाक्टरों को बुलाया, लेकिन कोई भी शेठ की बीमारी का इलाज नहीं कर सका।

शेठ की तबियत दिन प्रतिदिन और ज्यादा खराब होने लगी, वह चलने फिरने में भी असमर्थ हो गया था। एक दिन जब वो अपने बिस्तर पे लेता था तो, उसे अचानक से मोची के भजन गाने की आवाज सुनाई दी।

मोची के भजन, शेठ को बहुत अच्छे लग रहे थे। वह भजन सुन के इतना मंत्र मुग्ध हो गया की, उसे ऐसा लगने लगा की भगवान साक्षात उसके पास ही बैठे है।

मोची के भजन सुन के, शेठ को बहुत आनंद मिलता और भूल जाता की वह बीमार भी है। देखते ही देखते शेठ बिलकुल ठीक हो गया। एक दिन शेठ ने मोची को अपने घर बुलाया। और मोची से कहा ! मेरी बीमारी को बड़े से बड़ा डॉक्टर भी ठीक नहीं कर पाया, पर तुम्हारे भजन सुन के मै पूरी तरह ठीक हो गया।

शेठ ने मोची को धन्यवाद दिया और इनाम के रूप में उसे 50 हजार रूपये भी दिए। मोची इतने सारे पैसे ले के बहुत खुश हुआ और अपने घर चला गया।

पर मोची को उस रात नींद नहीं आई। वह रात भर यही सोचता रहा की इतने सारे पैसो का वह क्या करेगा, क्या क्या खरीदेगा। साथ ही यह भी डर थे की कही उसके पैसे चोरी ना हो जाये।

पूरी रात जागने की वजह से वह अगले दिन अपने काम पे भी नहीं गया। हर दिन का यही सिलसिला चलता रहा। मोची की दुकानदारी पूरी तरह से चौपट हो गई। और वह भगवान के भजन भी नहीं करता था।

जब ये चीजे ज्यादा बढ़ गई तब मोची को अकल आई,  वह शेठ के घर गया और कहा शेठ जी आप ये अपने पैसे वापस ले लो, इन पैसो की वजह से मै भगवान के भजन करना भूल गया। इन पैसो ने भगवान से मुझे दूर कर दिया साथ ही मेरी दुकानदारी भी ख़तम हो गई। और मोची वो पैसे लौटा के अपने काम में लग गया।

सीख : इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है की हम पैसो के चक्कर में इतना अंधे हो जाते है की हम अपनों से दूर रहने लगते है।

 

कहानी 3. किसान और जादुई हंस

काफी समय पहले की बात है, एक किसान के पास एक जादुई हंसनी थी, जो प्रतिदिन एक सोने का अंडा देती थी। इस अंडे से किसान के घर का की सारी जरूरत बड़े आराम से चल जाती थी, किसान उस अंडे को सोनार के पास बेच देता था।

सोनार उसे काफी धन देता, जिससे किसान और उसका परिवार बड़े आराम से अपनी जिंदगी जीते थे। किसान और उसकी पत्नी बहुत खुश थे और यह खुशी लंबे समय तक जारी रही।

लेकिन, किसान बहुत ही लालची था। एक दिन, किसान अपने मन में सोचा, ये हर दिन बस एक ही अंडा देती है। ” क्या हमें सिर्फ़ एक अंडा ही लेना चाहिए?  हम क्यों न एक बार में सभी अंडे ले ले। जिससे हम रातो रत  बहुत सारा पैसा कमा सकते हैं?”

किसान ने अपनी पत्नी को अपनी यह विचारधारा बताई और वह मूर्खतापूर्वक सहमत हो गई। फिर, अगले दिन, जब हंस ने अपना सोने का अंडा दिया, तो किसान तेजी से एक तेज़ चाक़ू ले आया।

उसने हंस को मार दिया और उसके पेट को फाड़ दिया, यह उम्मीद करते हुए कि उसे सभी सोने के अंडे मिल जाएंगे। लेकिन, जैसे ही उसने पेट खोला, वहां बस खून ही खून, सोने के अंडे का तो नाम निसान भी नहीं था।

किसान ने जल्दी से अपनी मूर्खतापूर्वक गलती का अहसास हुआ, और वह अपनी हार के कारण रोने लगा। दिन बीतते  गए, किसान और उसकी पत्नी गरीब होते गए। कितने ही अदृश्य और कितने ही मूर्ख थे वे। वे अपनी लापरवाही के लिए पश्चाताप करने लगे।

किसान और उसकी पत्नी ने सीख ली कि लालसा और अज्ञानता नुकसान पहुंचा सकते हैं। धन की प्राप्ति के लिए धैर्य और संयम आवश्यक होते हैं।

सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि लोभ के चक्कर में पड़कर हम अपनी मूर्खता का शिकार हो सकते हैं।

कहानी 4. बुद्धि से बड़ा कोई नहीं ( Hindi Kahaniya )

बहुत साल पहले की बात है। एक बहुत ही घने जंगल में, एक बहुत ही विशालकाय हांथी रहता था। वह बहुत ही शक्तिशाली था। उसके आंतक के कारन वहां के छोटे छोटे जानवर जंगल छोड़ के भाग गए थे।

क्यों की उस हांथी के भारी पांव और दांतो के उपद्रव से उन छोटे जानवरो के घर बर्बाद हो जाते थे। और कई तो उसके पैर के नीचे दब के मर जाते थे। इस कारन उस जंगल में अब छोटे जानवरो की कमी हो गई थी।

छोटे जानवरो की कमी के कारन, उस जंगल में रहने वाले सियारो को भोजन की कमी हो गई थी। उनकी हालत भुखमरी जैसी हो गई थी। इस समस्या से निपटने के लिए सियारी ने एक सभा बुलाई।

उस सभा में एक सियार ने कहा – “अगर ये हांथी मर जाये तो हमें इससे एक महीने का भोजन मिल जायेगा। और साथ ही इसके डर से जो छोटे जानवर जंगल छोड़कर भाग गए है वो भी वापस आ जायेंगे”।

तभी दूसरे सियार ने कहा – “मगर इसे मारेगा कौन ” इतने बड़े विशाल आकृति वाले दुस्ट जानवर को कौन मार सकता है। तभी उसमे बैठा हुआ, एक सियार का बच्चा बोला इसे मैं मार दूंगा।

बच्चे की बात सुनकर वहां बैठे सभी सियार हंसने लगे उनमें से एक सियार ने उस बच्चे से कहा बेटा यह खिलौने वाला हाथी नहीं है यह जंगल के वास्तविक में गजराज है। तुम उसे मारना तो छोड़ो उसके पास भी नहीं जा सकते।

उस सियार के बच्चे ने उत्तर देते हुए कहा कि आप लोग मेरी उम्र देख कर मेरे ऊपर हंस रहे हैं, मगर यहां पर ताकत की नहीं बुद्धि की जरूरत है। कृपया करके मुझे एक मौका दीजिए, मैं जरूर ही उस हाथी को मार गिराऊंगा।

उसकी बात सुनकर वहां के जो बूढ़े सियार थे, उन लोगों ने उस बच्चे को एक मौका दिया वह सियार का बच्चा हाथी के पास गया और हाथी को प्रणाम करते हुए कहा महाराज की जय हो।

हाथी ने चौक के देखा। क्योंकि आज तक उसे किसी ने भी महाराज नहीं कहा था। उसने उस सियार के बच्चे से कहा, तुम कौन हो बेटा। तब सियार के बच्चे ने कहा महाराज में इसी जंगल में रहता हूं मुझे जंगल की चिंता हो रही है।

क्यों कि इस जंगल में अब कोई भी राजा नहीं है। जंगल का राजा शेर भी बूढा हो गया है। एक जंगल का राजा होने के नाते जो भी गुण होने चाहिए, वह सारे गुण आपने है। इसीलिए हम सारे जानवरों ने मिलकर आपको राजा बनाने का सोचा है।

उन्होंने मुझे आपको बुलाने के लिए यहाँ भेजा है कि आप मेरे साथ चलिए और राज सिंहासन पर विराजमान होइए। हाथी खुश हो गया और सियार के बच्चे से पूछा कि कहां जाना है। सियार के बच्चे ने कहा महाराजा आप मेरे पीछे पीछे चलते रहिए।

हाथी सियार के बच्चे के पीछे चलने लगा। सियार का बेटा जानबूझकर हाथी को दलदल वाले रास्ते की तरफ ले गया। वह तो उस दलदल से पार हो गया मगर हाथी उस दलदल में फंस गया।

तब हाथी ने सियार के बच्चे से कहा अरे बेटा मैं अंदर धंसते जा रहा हूं। कृपया करके मेरी मदद करो। तब सियार का बच्चा हंसते हुए बोला महाराज। सियार तो हमेशा से ही दुष्ट प्रजाति के होते हैं।

और आपने मेरे जैसे जानवर पर विश्वास किया। अब इसका परिणाम भी भोगिए। तभी वहां पर सियारो का झुंड आ गया। और उस हाथी के ऊपर चढ़कर उसे जान से मार दिया।

शीख : कभी भी दुस्ट लोगो पे भरोसा नहीं करना चाहिए।

 

कहानी 5. एकता का महत्व ( Hindi Kahani )

एक समय की बात है, जब एक आदमी अपने बेटों के साथ रहता था। उसके चार बेटे थे,। ये चारो बेटे मेहनती तो थे, पर  वे अक्सर आपस में लड़ते-झगड़ते रहते थे। बुढ़ा आदमी उन्हें एक साथ प्यार से मिल के रहने के लिए समझाने की बहुत कोशिश करता पर वो लोग कभी भी एक दूसरे के साथ प्यार से नहीं रहते थे।

महीने बितते गए और बुढ़ा आदमी बीमार हो गया। उसने अपने बच्चों से कहा कि वे एकजुट रहें, लेकिन वे लोग उसकी आज्ञा का पालन नहीं किये। इस पर उस बूढ़े आदमी ने एक निर्णय लिया, ताकि उसके बच्चे एक साथ खुसी से रहे।

उसने अपने चारो बेटो को बुलाया और कहा ! “मैं तुम्हें एक डंडे का एक गुच्छा दूंगा,” “तुम्हें हर डंडे को दो टुकड़ों में तोड़ना होगा। “जो भी जल्दी से डंडे तोड़ेगा, उसे अधिक पुरस्कार मिलेगा।”

बुढ़ा आदमी ने हर एक को दस-दस डंडे की एक गुच्छा दी और उन्हें यह निर्देश दिए कि वे हर डंडे को टुकड़ों में तोड़ें। उसके लड़के डंडों को कुछ मिनटों में ही टुकड़े कर डाले और फिर से यह लड़ाई करने लगे कि ज्यादा इनाम किसको मिलेगा।

तभी पिताजी ने अपने हर एक बेटे को एक और डंडे की गुच्छा दी, और उन्हें  निर्देश दिया कि वे इनको साथ में तोड़ें। वे सभी इनाम पाने के लिए डंडे के गुच्छे को तोड़ने की कोशिश करने लगे, लेकिन वे उस गुच्छे को तोड़ने में असमर्थ रहे।

तब बुढ़ा आदमी बोले। “प्यारे बेटो,” देखो! एक अकेले डंडे को तुमने कितनी आसानी से तोड़ दिया। लेकिन जब वे डंडे साथ रहे तब तुम इन्हे तोड़ नहीं पाए! इसलिए, जब तक तुम एकजुट हो, कोई तुम्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकता।”

सीख : यह कहानी हमें सिखाती है कि एकता और एकजुटता की ताकत बहुत ज्यादा होती है। जब हम सभी मिलकर काम करते हैं और एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, तो हमें कोई भी मुश्किल नहीं होती। जब हम अलग होते हैं, तो हम अपनी अस्तित्व में कमजोर हो जाते हैं और किसी भी समस्या का सामना करना मुश्किल हो जाता है।

इस कहानी को सुनकर हमें यह समझना चाहिए कि हमारे परिवार, समाज और समुदाय में एकता और सद्भावना की आवश्यकता होती है। हमें एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना चाहिए और आने वाली समस्या को हल करने के लिए एकजुट रहना चाहिए।

कहानी 6. टिड्डा और गिलहरी

एक समय की बात है। गर्मी के दिनों में , एक टिड्डा खेत में खुशी से उछल- कूद कर रहा था, तभी वहां से एक गिलहरी गुजरी, जो अपने घर के लिए एक भुट्टे को बड़ी मुश्किल से ले जा रही थी।

तभी टिड्डा ने कहा!” अरे वो गिलहरी इतनी मेहनत करने की बजाय, तुम क्यों नहीं आकर मेरे साथ मस्ती करती हो?”

फिर गिलहरी ने कहा। “मैं सर्दी के लिए भोजन के इकठ्ठा कर रही हूँ, और मैं चाहती हु तुम भी यही करो।”

टिड्डा ने पूछा, “मुझे सर्दी में क्यों दिक्कत होगी? अभी तो हमारे पास पर्याप्त खाना है।” ये पूरा खेत खानो से भरा पड़ा है मुझे तो पूरे जीवन का खाना इस खेत से ही मिल जायेगा। तो मुझे मेहनत करनी की क्या जरूरत। तुम भी इस खेत के खाने से अपना जीवन आराम से जी सकती हो।

गिलहरी ने फिर उसकी बात को अनसुना कर के अपना काम जारी रखा। और सर्दी आने से पहले ही किसानो से फसल को काट लिया, खेतो में बारिस हुई जो भी बचा खुचा था वो सब बर्बाद हो गया। तो टिड्डा भूख से मर गया, जबकि गिलहरी अपने द्वारा बचाये गए अनाज से पूरी सर्दी आराम से निकल ली।

सीख : इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि मेहनत और तैयारी सदैव ही फलदायी होते हैं। जब हम समय पर मेहनत करके और योजना बनाकर तैयारी करते हैं, तो हमें कठिनाइयों से सामना करने की क्षमता प्राप्त होती है।
जैसे गिलहरी ने खाने के लिए भंडारण की तैयारी की और सर्दी में उसने उसी से अपना जीवन व्यापन किया। वहीं टिड्डा, जो मेहनत नहीं करना चाहा और तयारी नहीं की, उसे सर्दी ने मरने के लिए मजबूर कर दिया।

कहानी 7. बन्दर और मगरमच्छ ( Hindi Kahaniya )

नदी किनारे एक जंगली बेर के पेड़ पर एक बंदर रहता था। एक दिन उसे पेड़ के नीचे एक मगरमच्छ को देखा जो भूखा और थका हुआ दिख रहा था। उसने मगरमच्छ को कुछ बेर दिए, मगरमच्छ ने बंदर को धन्यवाद दिया और वे दोनों एक अच्छे दोस्त बन गए।

बंदर रोज़ाना मच्छर को बेर देता था। एक दिन मगरमच्छ ने बन्दर से अपनी पत्नी के लिए भी और अधिक बेर मांगे।मगरमच्छ की पत्नी को बेर बहुत पसंद आया।

लेकिन उसने अपने पति से कहा कि उसे बंदर का हृदय खाना है। मगरमच्छ परेशान हो गया की अपने दोस्त का हृदय कैसे ला सकता है, लेकिन उसने यह निर्णय लिया कि उसे अपनी पत्नी को खुश रखने के लिए बन्दर से गद्दारी करनी ही  पड़ेगी।

अगले दिन, मगरमच्छ, बंदर के पास गया और कहा कि उसकी पत्नी ने उसे रात के खाने के लिए बुलाया है। मगरमच्छ ने बंदर को अपनी पीठ पर बैठाकर नदी के पार ले गया।

उसके घर पहुंचते ही मगरमच्छ ने बंदर से अपनी पत्नी की इच्छा बताई। और कहा ! दोस्त मुझे माफ़ करना मेरी पत्नी की ख़ुशी के लिए मुझे ये करना ही पड़ेगा।

बन्दर उसकी बात सुन के डर गया बंदर को अपनी जान बचाने के लिए जल्दी ही कुछ सोचना था। उसने तुरंत मगरमच्छ से कहा, अपने मुझे पहले क्यों नहीं बताया।

मैं अपना दिल तो उस बेर के पेड़ में रख के आया हु, आप मुझे पहले बता देते की भाभी को मेरा दिल खाना है तो मैं अपना दिल साथ में ले आता। इनता सुनते ही मगरमच्छ उदास हो गया।

तब बन्दर ने कहा दोस्त तुम्हे उदास होने की जरूरत नहीं है। हम वापस चल के उस दिल को ला सकते है फिर तुम उसे भाबी जी को दे देना। मगरमच्छ खुश हुआ और बंदर को अपनी पीठ पे बैठा के वापस उस पेड़ के पास ले गया

उस नदी के पार पहुंचते ही बंदर ने पेड़ पर जल्दी से चढ़ गया। और कहा “मैं नीचे नहीं आ रहा हूँ; तुमने मेरे भरोसे को धोखा दिया है, और इसका मतलब है कि हमारी दोस्ती ख़त्म हो गई है।”

सीख : यह कहानी हमें यह सिखाती है कि दोस्ती में वफादारी और सच्चाई हमेशा महत्वपूर्ण होती है। लालच और धोखा देने के बदले में हमेशा सच्चाई और ईमानदारी का पालन करना चाहिए।

यह हमें बताती है कि धोखा देने से केवल अस्थायी आनंद मिलता है, जबकि ईमानदारी और सच्चाई हमेशा जीवन भर की खुशिया देती हैं।

कहानी 8. लालची राजा ( Hindi Kahani )

बहुत साल पहले एक राजा था, वो बहुत ही ज्यादा लालची था। अपनी बेटी को छोड़कर अगर उसे कुछ पसंद था तो वो था सोना (Gold) वह दिन भर सोने जमा करने के बारे ही सोचता रहता था।

एक दिन वह राजा अपने खजाना गृह में बैठा अपने सोने को देख रहा था तभी वह एक देवदूत आये। उन्होंने राजा से कहा राजा तुम बहुत ही अमीर हो तुम्हारे पास बहुत सारा सोना है।

देवदूत को देख कर राजा दुखी मन से बोला ! कहा अमीर हू। बस ये थोड़ा सा ही तो सोना है मेरे पास। तब देवदूत बोले अच्छा इतना सोना होते हुए भी तुम्हे संतोष नहीं, मुझे बताओ तुम्हे कितना सोना चाहिए।

राजा ने कहा मैं तो चाहता हू मै जिस चीज को भी अपने हांथो से छू लू वो सोने का हो जाये। देवदूत बोले अच्छा ठीक है, कल सुबह से तुम जिस किसी को भी छू लोगे वो सोने की हो जाएगी। और देवदूत वह से चले गए।

राजा की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। सारी रात राजा ख़ुशी के मारे राजा सो नहीं पाया, की कब सुबह हो, और मेरे पास सोना ही सोना होगा इस दुनिया का सबसे अमीर आदमी मै बन जाऊंगा।

जैसे ही सुबह हुई, राजा ने कुर्सी पे हाँथ रखा, वह कुर्सी सोने की हो गई। मेज को छुआ वह भी सोने का हो गया। राजा ये सब देख के बहुत खुश हुआ। उसने तुरंत ही अपने कमरे की सारी वस्तु को छू के सोने का बना दिया।

इसके बाद वह तुरंत ही अपने बगीचे में पहुंच गया। बगीचे में पहुंचकर उसने वहां के पेड़ों को छूना चालू किया। देखते ही देखते सारे पेड़ उनमे लगी पत्तियां और फल सब कुछ ही सोने में तब्दील हो गया।

दौड़ते दौड़ते ही वह जिस भी चीज को देखता उसे छूकर उसे सोना बना देता। काफी समय बीत जाने के बाद उसे यह अंदाजा हुआ कि उसके कपड़े भी सोने के हो गए थे, जो कि अब उसे बहुत भारी लग रहे थे।

अब राजा को प्यास और भूख भी लग गई थी। राजा अपने महल के अंदर आया और अपने सोने की कुर्सी पर बैठकर नौकरों से खाना मंगवाया जैसे ही राजा खाना खाने के लिए भोजन को हाथ लगाया तो देखते ही देखते वह भी सोने के हो गए।

उसने पानी पीने के लिए गिलास उठाया। तो वह गिलास और उसमें रखा पानी भी सोने का हो गया। राजा के सामने अब सोने की रोटियां, सोने की चावल रखे हुए थे। मगर उसे भूख लगी थी, और वह खाना नहीं खा पा रहा था।

राजा यह सब देखकर परेशान हो गया और रोने लगा। तभी अचानक राजा की लड़की खेलते हुए राजा के पास आ गई, अपने पिता को रोते देख वह पिता की गोद में जाकर बैठी और उसका आंसू पूछने लगी।

लेकिन जैसे ही राजा ने अपनी लड़की को छुआ, वह लड़की भी देखते ही देखते सोने में तब्दील होगी। अपनी लड़की को सोने में बदलता हुआ देख वह राजा और भी जोर जोर से रोने लगा। राजा की इस हालत पर देवदूत को तरस आ गया।

देवदूत वापस प्रकट हुए। देवदूत को देखते ही राजा, उनके चरणों में गिर गया। और रोते हुए उनसे प्रार्थना करने लगा, कि आप अपना वरदान वापस ले लीजिए मुझे सोना नहीं चाहिए।

तब देवदूत ने राजा से पूछा। क्यो अब बताओ एक गिलास पानी की कीमत ज्यादा है या सोने की। रोटी का एक टुकड़ा ज्यादा मूल्यवान है या सोना। राजा हाथ जोड़कर कहा सोने के बगैर तो काम चल सकता है।

मगर मैं एक गिलास पानी, और रोटी के टुकड़े की कीमत समझ गया हु। रोटी और पानी के बिना मनुष्य नहीं रह सकता। कृपया करके आप अपना वरदान वापस ले लीजिये। अबसे मैं सोने का लालच नहीं करूंगा।

देवदूत ने राजा को एक लोटा जल दिया। और कहां तुमने जिस भी चीज को सोना बनाया है, यह जल, उस पर छिड़कने से, वापस सब पहले जैसा हो जाएगा। राजा हर वस्तु पे वह जल छिड़क दिया और सारी चीजें पहले जैसी हो गई।

कहानी 9. झूट और सच

किसी गांव में एक पंडित जी रहते थे। एक बार एक यजमान ने उनको एक बकरा दान में दिया। पंडित जी बकरा पा के बहुत खुश हुए, और उसके पाने कंधे में उठा के अपने घर जाने लगे।

रास्ता सुनसान था। थोड़ी ही दूर पे तीन ठग बैठे थे, उन लोगो ने देखा की पंडित जी अपने साथ एक बकरा ला रहे है तब उन लोगो ने उस बकरे को हथियाने का तरकीब बनाई।

तीनो अलग अलग हो गए। फिर एक ठग पंडित जी के पास गुजरते हुए बोला। पंडित जी ये आप क्या अनर्थ कर रहे हो, पंडित हो के भी एक कुत्ते को अपने कंधो में उठाया है।

पंडित जी गुस्सा करते हुए बोले, अँधा हो गया है क्या, ये तू क्या कह रहा है, ये कुत्ता नहीं बकरा है। इस पर ठग ने कहा, मुझे क्या मतलब तुम्हे जो करना है करो, मेरा तो काम था तुम्हे बताना सो मैंने बता दिया बाकि तुम्हारी मर्जी।

थोड़ी दूर चलने के बाद पंडित जी को दूसरा ठग मिला। उसने भी पंडित जी से कहा, पंडित जी आप इतने बड़े कुल के है, आपको शोभा नहीं देता की आप कुत्ते को अपने कंधो पे बैठाओ ? आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। पंडित जी उसकी बात सुन के गुस्सा हो के मुँह बनाते हुए बिना कुछ बोले आगे बढ़ गए।

इसी तरह थोड़ा आगे चलते हुए उसे तीसरा ठग मिला। उसने पंडित जी से पूछा की आखिर क्या कारन है जो आप इस कुत्ते को अपनी पीठ पे उठा के ले  जा रहे हो, क्या आप अपने कोई पापों का प्रायश्चित कर रहे हो।

जब पंडित जी ने तीसरे ठग के मुँह से ये बात सुनी तो पंडित जी के मन में आया कि, हो न हो शायद ये मेरी आँखों का भ्रम ही है, क्यों कि इतने सारे लोग एक साथ झूट नहीं बोल सकते शायद ये कुत्ता ही है।

ऐसा सोचते हुए वो अपने बकरे को कुत्ता समझ के अपने कंधे से उतार दिए और अपने घर चले गए। फिर तीनो ठग ने उस बकरे को मार कर खा गए। इसलिए कहा जाता की एक ही जूठ को बार बार सफाई से बोलने के बाद वह सच जैसा लगने लगता है।

कहानी 10. मुसीबत का सामना ( Hindi Kahaniya )

कई बार इंसान के जीवन में ऐसा समय आता है जब वो परेशानी से घिर जाता है, और यह वही समय होता है जब इंसान की असली परीक्षा होती है। अधिकतर लोग इस समय टूट जाते है और अपना धैर्य खो देते है। लेकिन इंसान को चाहिए की वो धैर्य से काम ले और अपनी शक्तियों को पहचाने, और घबराये नहीं। क्यों की चाणक्य ने भी कहा है, साहस ऐसे चीज होती है जो हर समस्या को हरा सकती है।

किसी जंगल में एक गधा रहता था, एक बार वह गधा जंगल में घांस चर रहा था, तभी वहां अचानक से एक भेड़िया आ गया। गधा को देखकर कर भेड़िया बहुत खुश हुआ, की चलो आज इस गधा का शिकार किया जाये।

ये गधा बहुत मोटा ताजा है इसको खा के तो बहुत मजा आ जायेगा। यही सब सोचकर वह गधे के पास चला गया और गले से बोला अरे! वो गधे तेरे दिन अब खत्म हो गए हैं। मैं तुझे जान से मारने वाला हूं

अपने पास अचानक से भेड़ियों को देखकर गधा हक्का-बक्का रह गया। उसे समझ में नहीं आ रहा था, कि वह क्या करें। क्योंकि वह अब भाग भी नहीं सकता था, अगर वह भागता तो भेड़िया उसे तुरंत मार देता।

गधे ने अपनी जान बचाने के लिए तुरंत एक तरकीब सोचा। उसने भेड़िए से कहा। श्रीमान आपका स्वागत है मुझे कल ही रात को ही सपने में भगवान के दर्शन हुए थे।

भगवान ने मुझसे कहा था कि आज कोई बहुत ही बुद्धिमान और दयालु जानवर मेरा शिकार करेगा। और मुझे पूरा यकीन है कि वह बुद्धिमान और दयालु जानवर आप ही है।

हे भेड़िए महाराज, भगवान के कहे अनुसार मैं खुद ही आपका शिकार बनना चाहता हूं। बस मरने से पहले मेरी एक आखिरी इच्छा है क्या आप उस मेरी उस इच्छा को पूरी करेंगे।

भेड़िया, गधे की यह बात सुनकर खुश हो गया। और उसने बोला हां हां क्यों नहीं पूरा करूंगा। तुम बताओ तुम्हारी आखिरी इच्छा क्या है? गधे ने विनम्रता से कहा कि मेरे पैर मैं एक कंकड़ फस गया है। क्या? आप उसे निकाल देंगे।

भेड़िया, खुश हो गया। और बोला, बस इतना सा काम। लाओ अभी निकाल देता हूं। बताओ कहां है कंकड़। फिर भेड़िया, गधे के पीछे जाकर जैसे ही उसके पैरों के पास खड़ा हुआ।

गधे ने अपने दोनों पैर उठाकर भेड़िए के मुंह में इतनी जोर से लात मारी, कि भेड़िया, दूर झाड़ियों में गिर गया। फिर वह गधा बहुत तेजी से वहां से भाग निकला। भेड़िया बस उसे झाड़ियों में पड़े पड़े देखते का देखता ही रह गया।

सीख: परेशानी का हल होता है बस हमें चाहिए और धैर्य से काम लेना चाहिए।

कहानी 11. हांथी और दोस्त ( Hindi Kahani )

एक बार की बात है एक हाथी था। उसका कोई भी दोस्त नहीं था। एक दिन, वह जंगल में दोस्त ढूंढ़ने के लिए निकल पड़ा। उसने एक बंदर को देखा और उससे पूछा कि क्या वह मेरा दोस्त बनना चाहेगा। बंदर ने यह कहते हुए मना कर दिया की, “तुम पेड़ों पे मेरे जैसे झूल नहीं सकते, इसलिए मै तुम्हारा दोस्त नहीं बन सकता।”

फिर हाथी को एक खरगोश मिला, हांथी ने उससे अपना दोस्त बनने के लिए पूछा। खरगोश ने भी इनकार कर दिया, यह कहते हुए की, “तुम मेरे छोटे से घर में प्रवेश नहीं कर सकते क्यों की तुम बहुत बड़े हो।”

फिर हाथी को रस्ते में एक मेंढ़क मिला, उसने भी हांथी को इनकार कर दिया, की “तुम मेरे जैसे कूद नहीं कर सकते। ” हाथी जंगल के और  अंदर गया, जहां उसे एक लोमड़ी  मिला। लोमड़ी ने भी हाथी को अपना मित्र बनाने से बना कर दिया।

निराश होकर, हाथी वापस अपने झुण्ड में लौट आया। हालांकि, उसे एक सच्चे दोस्त की तलाश थी इसलिए अगले दिन उसने फिर से जंगल जाने का फैसला किया।

जब वह जंगल में प्रवेश किया, तो हाथी ने सभी जानवर अपनी जान बचाने के लिए दौड़ते हुए देखा। हाथी ने खरगोश को रोका और पूछा कि क्या हुआ है। खरगोश ने कहा, “बाघ हमें खाना चाहता है, इसलिए हम सब अपनी जान बचाने के लिए दौड़ रहे हैं।”

हाथी सोचने लगा कि वह जानवरों की मदद के लिए क्या कर सकता है। इसी बीच बाघ हांथी के पास पहुंच गया। हांथी ने बाघ से कहा  “बाघ, कृपया कर के इन जानवरों को छोड़ दीजिए। इन्हे मत मारिये,” हाथी ने विनयपूर्वक बाघ से कहा।

बाघ ने दहाड़ते हुए कहा । “भागो नहीं तो मैं तुम्हें भी मारकर खा जाऊंगा,” बाघ की बात सुनते ही हाथी को गुस्सा आया और उसने बाघ को लात मारी। हांथी की लात पड़ते ही बाघ भाग गया। अब सभी जानवर हाथी के साथ दोस्त बनना चाहते थे।

सीख : आप उन लोगों के साथ भी दोस्ती कर सकते हैं जो आपसे अलग होते हैं।

कहानी 12. एक खाली मटका

एक बार एक राजा को अपने राज्य के लिए एक वारिस की जरूरत थी। इसलिए उसने अपने राज्य के बच्चों से एक परीक्षा लेने का निर्णय किया। राजा ने हर एक बच्चे को एक बीज दिया और कहा, “जिस बच्चे के बीज से सबसे अच्छा फूल निकालेगा, उसे मैं अपने वारिस के रूप में चुनूंगा।”

सभी बच्चे ने अपने बीजों को ध्यान से पाला, पानी दिया और उन्हें सूरज की रोशनी और मिट्टी की गर्मी से लगातार सुरक्षा दी। ऐसे ही काफी दिनों के बाद, सभी बच्चों के बीजों से फूल निकलने लगे।

लेकिन एक बच्चे के बीज से कुछ नहीं निकल रहा था। उसका बीज वाला मटका खाली का खाली ही रहा। वह बच्चा बहुत चिंतित हुआ क्योंकि उसे लग रहा था कि वह अपनी परीक्षा में नाकामयाब हो गया है।

परन्तु जब सब बच्चे अपने फूल राजा के सामने लाए। जब राजा ने सभी बच्चों के फूल देखे, तो उन्होंने पूछा “बच्चों, तुम सभी ने बहुत अच्छा काम किया है। तुम्हारे फूल बहुत सुंदर हैं। लेकिन क्या यहाँ कोई ऐसा भी है जिसके बीज से भूल नहीं निकला, राजा ने गुस्से में पूछा।

तभी डर के मारे, वह बच्चा उठा और कहा, “महाराज, मेरे पास कोई फूल नहीं है क्योंकि मेरा बीज खाली था। मैंने सोचा था कि मैं उसे अच्छी तरह से पाल रहा हूँ, लेकिन फिर भी कुछ नहीं हुआ।”

राजा ने चिंता भरे चेहरे से बच्चे को देखा और फिर मुस्काने लगे। उन्होंने सभी बच्चों को बुलाया और कहा, “बच्चों, इस बच्चे ने सच कहा है। मैंने आपको सभी को जो बीज दिए थे, उससे कभी भी फूल नहीं निकल सकता था, सुच बोल के सिर्फ यही बच्चा इस परीक्षा में पास हुआ है।”

यह सुनकर सभी बच्चे चौंक गए और वे बच्चा बहुत खुश हुआ। फिर राजा ने उस बच्चे से कहा, “तूने वास्तव में एक अद्वितीय चीज दिखाई है।  तूने सच्चाई और ईमानदारी की उच्चता दिखाई है। इसलिए तू मेरे वारिस के रूप में चुना जाता है।”

शीख:  यह सबक सभी को सिखाया कि सच्चाई, ईमानदारी और प्रेम हमारे अद्वितीय गुण होते हैं, जो हमें अलग बनाते हैं। जब हम खुद को सच्चाई और ईमानदारी से युक्त रखते हैं, तो हमारी मूल्यवानता को कोई दूसरा मान्य नहीं कर सकता है।

कहानी 13. पिता और पुत्र ( Hindi Kahaniya )

एक समय की बात है, एक पिता अपने पुत्र के साथ खेल रहे थे। तभी वहां अचानक से उड़ता हुआ एक कौवा आ गया। कौवे को देखकर छोटे बच्चे ने अपने पिता से कहा, पिता जी यह क्या है ? उसके पिता ने कहा बेटा यह कौवा है।

बच्चे ने फिर पूछा पिताजी है क्या ? उसके पिता ने फिर कहा कि बेटा ये कौवा है। बेटा बार-बार पूछता रहा यह क्या है ? उसके पिता बड़े प्यार से अपने बेटे को हर बार बताते रहे कि यह एक कौवा है।

काफी साल बीत गए, अब वह बच्चा बड़ा हो गया, और उसके पिता बूढ़े हो गए। एक दिन पिताजी घर के बाहर खाट पर बैठे थे, तभी उसके पुत्र से मिलने उसका दोस्त आया। तब बेटे से पिता ने पूछा यह कौन है ? बेटे ने जवाब दिया या मेरा दोस्त है और मुझसे मिलने आया है।

पिता ने फिर पूछा बेटा यह कौन आया है। पुत्र ने इस बार गुस्सा होकर कहा ! यह मेरा दोस्त है, और मुझसे मिलने आया है। आप चुपचाप घर पे बैठे क्यों नहीं रहते है। कुछ काम धाम तो है नहीं आपके पास। कौन है, किस लिए आया है, इससे आपको क्या लेना देना।

पिता जी चुप हो गए और गहरी लंबी सांस लेकर मन में ही कहा ! बेटा मेरे एक बार पूछने पर तुम इतना गुस्सा हो गए। जब तुम छोटे थे, तब तो एक ही बात को सैकड़ों बार पूछते थे, और मैं हर बार तुम्हें प्यार से बताता था।

सीख – हमें हमेशा यह बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमारे माता-पिता ने हमारे पालन-पोषण कितना कष्ट उठाया है इसलिए हमें कभी भी उनसे ऊंची आवाज में बात नहीं करनी चाहिए ना ही कभी उनसे गुस्सा करना चाहिए

कहानी 14. बादशाह और माली ( Hindi Kahani )

बहुत साल पहले की बात है। एक बादशाह थे। वह बादशाह हमेशा ही जरूरतमंदों की मदद करते थे। इस कारण उनकी प्रजा भी उन्हें बहुत प्यार करती थी। बादशाह बहुत नेक दिल थे, उनकी नेकी की कहानी दूर-दूर तक प्रचलित थी।

एक बार वह बादशाह अपने मंत्री के साथ घूमने निकले। रास्ते में उन्हें एक बहुत ही सुंदर बगीचा दिखाई दिया। बादशाह बादशाह ने देखा कि उस बगीचे में एक बूढ़ा माली, एक आम का पेड़ लगा रहा है। बादशाह उस के पास गए और उससे कहा क्या बगीचा तुम्हारा है।

माली ने कहा है, हाँ यह बगीचा मेरा है। इस बगीचे को मेरे दादा, परदादा ने लगाया था। और मैं इस बगीचे की देखरेख करता हूं। तब बादशाह ने कहा अच्छा, तो फिर तुम यह आम के पेड़ क्यों ? लगा रहे हो।

कहीं तुम यह तो नहीं सोच रहे हो कि इस आम का पेड़ का फल तुम्हें खाने को मिलेगा। तुम तब तक जीवित ही नहीं रहोगे। बादशाह की बात सुनकर माली ने कहा।  मैं अब तक दूसरों के द्वारा लगाए गए पेड़ के बहुत सारे फल खा चुका हूं।

इसलिए अब मुझे दूसरों के लिए पेड़ लगाने की जरूरत है, ताकि मेरे बेटे, मेरे पोते, मेरे द्वारा लगाए गए पेड़ों के फल खा सकें। बादशाह माली की बात सुनकर बहुत खुश हुआ और उसे इनाम के रूप में सोने की मोहर दी।

सीख – इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है की हमें अपने आने वाली पीढ़ी के लिए भी सोचना चाहिए।

कहानी 15. बंदर और बिल्ली

एक गांव में दो बिल्लियां रहती थी, उन दोनों में बहुत ही प्यार था, वह हमेशा एक दूसरे से मिलजुल कर रहती थी। उन दोनों बिल्लियों में से किसी को भी कुछ खाने को मिलता तो वह दूसरे बिल्ली के साथ बांट के खाया करती थी।

एक दिन उन दोनों बिल्लियों को, एक साथ, एक रोटी मिला। उन्होंने उस रोटी को बीच से तोडा और आपस में बांट लिया। मगर तभी उन दोनों में झगड़ा हो गया। उनमें से एक ने कहा कि तुम्हारे हिस्से में जो रोटी का टुकड़ा आया है वह ज्यादा बड़ा है।

तो दूसरे ने कहा नहीं। मेरा रोटी का टुकड़ा ज्यादा बड़ा नहीं है। हम दोनों का ही टुकड़ा बराबर है। जब उन दोनों का झगड़ा शांत नहीं हुआ तो वह दोनों इस मसले को निपटाने के लिए बंदर के पास गए। उन्होंने बंदर को अपनी समस्या बताइ।

बंदर ने उनकी समस्या को हल करने के लिए एक तराजू मंगाया। तराजू के दोनों तरफ रोटी को रख दिया। रोटियों को तौलते समय, जिस रोटी की तरफ वजन ज्यादा था उस रोटी से थोड़ा सा टुकड़ा तोड़ कर अपने मुंह में डाल लिया, और खा गया।

फिर उस तरफ के रोटी का टुकड़ा हल्का हो गया तथा दूसरी ओर का बड़ा भारी। बंदर ने दूसरी ओर के टुकड़े से भी थोड़ी सी रोटी थोड़ी और मुँह में डाल के खा गया। इसी प्रकार वह बारी-बारी से दोनों तरफ से थोड़ा-थोड़ा टुकड़ा तोड़कर खाने लगा।

जब बंदर रोटी का काफी हिस्सा खा गया और रोटी बहुत कम ही बची। तब बिल्लियों को होश आया। उन्होंने बंदर से कहा कि आप अब रहने दीजिए। अब आप ज्यादा कष्ट मत करिए। हम खुद ही बटवारा कर लेंगे।

तब बंदर ने कहा ठीक है। जैसा तुम कहती हो वैसा ही होगा। मगर मैंने इतना मेहनत किया है, तो मुझे भी इस रोटी का कुछ हिस्सा मिलना चाहिए। इतना कहकर बंदर ने दोनों तरफ के टुकड़ों को उठाया और खा लिया। फिर वहां से चला गया। दोनों बिल्लिया बिचारी देखती ही रह गई और बाद में बहुत ज्यादा पछताई।

सीख – आपसी लड़ाई में हमेशा ही दुसरो का भला होता है। इसलिए बेहतर यही की आपसी लड़ाई खुद ही solve कर लेनी चाहिए।

कहानी 16. जिस का जो काम है, वह उसी को शोभा देता है ( Hindi Kahaniya )

गंगा नदी के किनारे एक बहुत ही घना जंगल था। उस जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे। सभी लोग मिलजुल कर बड़े प्यार से रहते थे। उसी जंगल के एक बहुत बड़ा गुफा था। उस गुफा में एक शेर और शेरनी रहते थे।

उसके थोड़ी ही दूर पर एक सियार और सियारीन अपने परिवार के साथ रहता था। सियार, शेर का खास दोस्त था और पूरा दिन उसके ही साथ रहता था। शेर जहाँ भी जाता था उसे अपने साथ लेकर जाता और कभी भी शिकार करने भी जाता था।

तब भी सियार को अपने साथ ही लेकर जाता था। जब शेर किसी जानवर का शिकार कर लेता था तो आधा मांस सियार को दे देता था, और आधा खुद खाता था। सियार ख़ुश होकर उसे घर लाकर अपने परिवार के साथ बैठ के मजे से मांस को खाते थे।

एक दिन शेर गहरी नींद में सो रहा रहा था। तभी शेरनी ने शेर से कहा – बहुत जोरो की भूख लगी हैं और अभी तक आप सो रहे हो। जाओ ना किसी जानवर को मार कर लाओ। अब मेरे से एक मिनट भी भूख बरदास नहीं हो रही हैं।

शेर अंगड़ाई लेकर उठा और तनकर खड़ा हो गया और शेरनी से पूछा – क्या मेरे मुछ के बाल खड़े हैं शेरनी ने कहा- हाँ, शेर ने फिर पूछा क्या मेरे पूछ ऊपर की ओर उठी हैं। शेरनी ने कहा – हाँ, शेर ने फिर पूछा – क्या मेरी आँखे लाल – लाल हैं, शेरनी ने कहा – हाँ आपकी दोनों आँखे लाल हैं।

इतना सुनकर शेर ने कहा अब ठीक हैं। मैं अभी जंगल में जाकर एक शिकार करके लाता हूँ फिर हमदोनो मिलकर खाएंगे। इतना बोलकर वह जंगल में जाकर एक हिरन को मार कर घसीटते हुए घर लाता हैं और दोनों मिलकर खाने लगते हैं।

सियार उसके गुफा के बाहर से काफ़ी देर तक शेर और शेरनी की बातों को को बात को सुन रहा था और अपने मन में सोचता हैं की क्या सच में यही तरीका होता हैं शिकार करने का। तब तो मैं भी बहुत आसानी से शिकार कर सकता हूँ।

अब मुझे शेर के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा। अब मैं खुद से अपना शिकार करूँगा। सियार ख़ुश होकर जल्दी से अपने घर गया। जहाँ सियारीन कब से उसका राह देख रही थी की सियार कुछ खाने को लाएगा।

वह जैसे ही घर पंहुचा, उसके खाली हाथ देखकर सियारीन उससे पूछी की, कुछ खाने के लिए नहीं लाये। इस पर सियार ने कहा – अब मुझे दूसरे का भरोसा नहीं हैं। मुझे शिकार करने का तरीका पता चल गया हैं। मैं अब खुद से शिकार कर सकता हूँ।

अब मैं तुमसे जो कुछ भी पूछूंगा उसका  जवाब हाँ में देना। फिर एक लम्बी से अंगड़ाई लिया और तनकर खड़ा हो गया और सियारीन से पूछा – मेरी मुछ के बाल खड़े हैं क्या? सियारीन ने उसको देखा और हसकर बोली – आपकी मूंछ कहा हैं। जब रहेगा तब न खड़ा होगा।

इतना सुन कर सियार गुस्से से बोला – अरे दुष्ट मैंने तुझे समझाया था न, की तू मेरे हर सवाल का जवाब हाँ में देना हैं। तुझे मांस खाना हैं की नहीं, ज्यादा गुस्सा दिलाएगी तो तुझे ही जान से मार दूंगा और आज खाना तेरे ही मांस से काम चला लूंगा, वैसे भी मुझे भी बहुत जोरो की भूख लग रही हैं।

अब अगर तूने ठीक से उत्तर नहीं दिया न तो देखना मैं क्या करूँगा। फिर दुबारा उसने सियारीन से पूछा – क्या मेरी पूछ ऊपर की ओर उठी हुयी हैं। सियारीन ने उसके पूछ की देख कर कहा – आपकी पूछ तो बालो से भारी पड़ी हैं।

वह ऊपर की ओर कैसे उठेगी? अब सियार गुस्से से आग बबूला हो गया और सियारीन को अपने पैरो से मार मार के उसकी हालत ख़राब कर दिया। फिर बोला की अगर तूने इस बार अच्छे से जवाब नहीं दिया तो देखें मै क्या करता हूँ तेरे साथ।

इसके बाद सियार ने तीसरा सवाल पूछा – क्या मेरी आँखे लाल लाल हैं, इस बार सियारीन डर कर मारे हाँ बोल दी। इतना सुनकर सियार छलांग मारकर बाहर जंगल की ओर निकला। जंगल में शिकार करने के लिए जानवरो को ढूढ़ने लगा।

दोपहर का समय था। तभी थोड़ी दूर पर एक पेड़ के नीचे एक भैसा बड़े आराम से सो रहा था। सियार उसे देखा और ख़ुश हो गया की आज तो इसका मांस खाने में मजा आने वाला हैं उसने धीरे धीरे उसके पास गया और उस पर जोर से झपटा और उसकी गर्दन पकड़ना चाहा।

भैसे की नींद खुल गई और उसने, सियार को जोर से झटका दिया की वह दूर जा गिरा। फिर उसे अच्छी तरह से पता चल गया की ये तो मुझे मारने आया था।

उसने फिर सियार को अपने नुकले सींग पर टांग कर इतना दूर फेका की वह एक बड़े से पत्थर में जाकर के टकरा गया और बेहोस हो गया। काफी देर बाद उसे होश आया। उसे बहुत काफ़ी चोट लग गई थी।

किसी तरफ दर्द को बर्दाश्त करके, अपने पैरो को घसीटता हुआ अपने घर तक पंहुचा। सियारीन ने जब उसका ऐसा हाल देखा तो वह घबरा गई और उससे पूछने लगी की किसने आपकी ऐसी हालत की हैं।

सियार ने उससे सारा किस्सा सुनाया। तब सियारीन ने कहा – बिना सोचे समझें दुसरो की नक़ल करने का यही परिणाम होता हैं। शेर जंगल का राजा हैं और बहुत शक्तिशाली भी हैं। तुम उसकी बराबरी नहीं कर सकते हो, जिसकी जितनी क्षमता होती हैं न उसी के अनुसार काम करना चाहिए दूसरे की नक़ल करने पर इसी प्रकार की दुर्दशा होती हैं।

सीख – इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है की कभी भी दूसरी की नक़ल कर के कोई काम नहीं करना चाहिए।

कहानी 17. नेक बच्चा ( Hindi Kahani )

एक बार एक बच्चा अपने घर के पास खेल रहा था। उसने एक परेशान कुत्ते को देखा जो बहुत दुखी था। बच्चा ने पूछा, “तुम क्यों रो रहे हो?” परेशान कुत्ता ने कहा, “मैं भूखा हूँ और कोई मुझे खाना नहीं दे रहा।”

बच्चा ने दया भाव से कहा, “तुम चिंता न करो, मैं तुम्हारी मदद करूँगा।” वह अपने घर से खाना लेकर वापस आया और उसे परेशान कुत्ते को खिलाया। कुछ समय बाद, परेशान कुत्ता स्वस्थ हो गया और खुशी खुशी घुमने लगा। बच्चा बहुत खुश हुआ क्योंकि उसकी दयालुता ने किसी के जीवन में सुख लाया।

सीख : इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें दूसरों की मदद करनी चाहिए और दया भाव से दूसरों का साथ देना चाहिए।

कहानी 18. व्यर्थ ही मुँह मत खोलो

एक तालाब में एक कछुआ रहता था। दो हंस उसके मित्र थे। वे दोनों उस कछुए का बहुत ध्यान रखते थे। और उससे बहुत प्यार भी करते थे एक समय बरसात ना होने के कारण तालाब सूखने लगा, जिसके चलते वह कछुआ हमेशा उदास रहने लगा।

उस कछुए को दुखी देखकर, उसके दोनों दोस्तों ने उससे पूछा। क्या हुआ मित्र ? तुम इतने उदास क्यों हो। कछुए ने अपनी चिंता का कारण बताया। कछुए की बात सुन के दोनों हंस भी चिंतित हो गए।

उन्होंने उस कछुए से कहा, तुम चिंता मत करो। मित्र होने के नाते हम तुम्हारी कुछ ना कुछ मदद जरूर करेंगे। तभी वे लोग साथ बैठकर सोचने लगे, कि आखिर इस समस्या का उपाय कैसे किया जाए।

कछुए ने कहा आप लोग एक लकड़ी ले आइए। मैं उस लकड़ी के, बीच में, अपने दांतों से पकड़ लूंगा। और आप लोग उस लकड़ी को दोनों ओर से अपने चोंच में दबाकर उड़ना, तो साथ-साथ में भी उड़ने लगूंगा।

इसके बाद उन दोनों हंसो ने एक बहुत बड़ा तालाब देखा और अपने साथ एक लकड़ी लेकर आए। उन्होंने कछुए से कहा, कि दोस्त कुछ भी वजह तुम अपना मुंह मत खोलना। कछुए ने कहा ठीक है, और वह उस लकड़ी को अपने मुंह में दबा लिया।

हंस उस लकड़ी को लेकर उड़ने लगे। कुछ समय बाद जब वे एक गांव से गुजर रहे थे, तो वहां गांव के बच्चों ने इस दृश्य को देखा। बच्चे शोर मचाने लगे, देखो यह हंस केकड़े को लेकर उड़ रहे हैं। जब यह बात कछुए ने सुनी तो उसने गुस्से से चिल्लाना चालू किया।

मूर्ख मैं केकड़ा नहीं कछुआ हूं। जैसे ही कछुआ मुंह से ये शब्द कहा, उसके मुंह से लकड़ी छूट गई। और वह जमीन पर आकर गिर गया मरते-मरते कछुआ बस यही सोच रहा था कि काश मैंने अपना मुंह नहीं खोला जाता तो आज मैं जिंदा बच जाता।

कहानी 19. विद्या का महत्व ( Hindi Kahaniya )

दीपक एक गांव में रहने वाला छोटा सा बच्चा था। उसके पिता एक किसान थे और उन्होंने हमेशा से दीपक को बढ़े होकर भी किसान ही बनाने का सोचा था। लेकिन दीपक के मन में एक ख्वाब था – वह पढ़ाई करके डॉक्टर बनना चाहता था।

एक दिन, दीपक ने अपने ख्वाब को अपने पिता से साझा किया। पिता ने दीपक को मुस्कराते हुए कहा, “मेरे बेटे, तू अपने ख्वाब को पूरा कर सकता है। तू मेहनत करेगा और पढ़ाई करेगा, तो तू किसी भी क्षेत्र में सफल हो सकता है।”

दीपक के पिता ने अपने परिवार की सारी बचत जमा करके उसे अच्छे स्कूल में भेजा। दीपक मेहनती और उत्साही छात्र था और उसके अध्ययन में बहुत रूचि थी। वह दिन-रात मेहनत करता और अच्छे अंक प्राप्त करता।

दीपक का सपना था डॉक्टर बनने का, और उसी सपने ने उसे पढ़ाई में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अंततः, उसने अपने पढ़ाई से उत्तीर्ण होकर एक बड़े अस्पताल में आँखों का डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया।

सीख : इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि विद्या और पढ़ाई का महत्व क्या है। विद्या ही हमें सफलता के रास्ते में आगे बढ़ने की सामर्थ्य प्रदान करती है और हमें अपने सपनों को पूरा करने की शक्ति देती है।

कहानी 20: लोमड़ी और अंगूर ( Hindi Kahani )

यह कहानी एक लोमड़ी की है। एक दिन एक चालाक लोमड़ी बहुत भूखी थी और वह खाने की तलाश में थी। उसने कई जगह जाकर खाना ढूंढ़ा, लेकिन उसे कुछ भी खाने के लिए नहीं मिला। अंत में, उसकी भूख बढ़ती रही और थक-हारकर वह एक किसान के घर के पास आकर रुक गई।

उस घर की दीवार पर एक अंगूर का पेड़ था। वहां पर गहरे जामुनी रंग के रसभरे अंगूर लटक रहे थे। लोमड़ी ने उस पेड़ के अंगूरों को देखकर उसे खाने का मौका मिलेगा यह सोचा। वह मान गई कि ये अंगूर पके हुए और खाने के लिए तैयार होंगे।

लोमड़ी ने हवा में एक ऊँची छलांग लगाकर अंगूर पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह उन तक पहुंच नहीं सकी। वह बार-बार प्रयास की, लेकिन अंत में उसे अंगूर नहीं मिले।

थक हार कर, लोमड़ी ने फैसला किया कि वह अपने घर वापस जाएगी। वह रास्ते में यही बड़बड़ाती रही, “मुझे विश्वास है कि वे अंगूर खटके ही थे।” लोमड़ी को अंगूर मिलने का मौका नहीं मिला और उसकी भूख नहीं मिट सकी। उसने हार मानकर पटकते हुए अपने घर की ओर चल दिया।

कहानी 21. गुलाब और कैक्टस

एक गुलाब का पौधा था, उसे अपनी सुंदरता पर बहुत गर्व था। वह केवल एक बात से निराश था कि वह कैक्टस के पास उगा हुआ था। गुलाब अपने रंग-रूप पर बहुत घमंड करता था।

वह हर रोज कैक्टस की ओर इशारा करके उसका मजाक उड़ाता था, लेकिन कैक्टस बहुत ही शांत स्वभाव का था और हमेशा चुप रहता था। बगीचे के अन्य पौधे गुलाब को समझाने की कोशिश करते थे, परंतु गुलाब को अपनी सुंदरता पर बहुत घमंड था।

एक गर्मियों के दिन बगीचे में कुआं सूख गया। उस वक्त पौधों को पानी नहीं मिल रहा था। गुलाब रोज-रोज़ बिलकुल मुरझाने लगा। तभी उसकी नजर एक चिड़िया पर पड़ी, जो कैक्टस पर अपनी चोंच डालकर पानी पी रही थी।

इससे गुलाब को अपने हरकत पर शर्मिंदगी महसूस होने लगी, और वह धीमी आवाज में कैक्टस से थोड़े से पानी के लिए पूछा। कैक्टस दयालु, शांत और सहानुभूति भरा था। उसने तुरंत ही गुलाब की बात मान लिया।

और दोनों ने एक अच्छे दोस्ती की शुरुआत की। वे मिलकर तपते हुए गर्मियों की मुश्किलों का सामना किया। फिर बारिश का मौसम आया और कुआं में पानी भर गया। अब गुलाब को न अपनी सुंदरता पर घमंड था और न ही वह कैक्टस का तिरस्कार कर रहा था। इससे बगीचे के अन्य पौधे खुशहाल हो गए और सभी एक-दूसरे का ध्यान रखने लगे।

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