Murkh Pandit Katha, चार मूर्ख पंडित की कहानी – Best Muhavre Ki Kahani 2023

मुर्ख पंडित  Murkh Pandit Katha

यह कहानी है चार मुर्ख पंडित ( Murkh Pandit Katha ) के बारे में बहुत समय पहले की बात है, उस समय आज की तरह स्कूल नहीं हुआ करते थे।

तब के छात्र शिक्षा लेने के लिए गुरुकुल में जाते थे। उस समय शिक्षक, छात्रों से शुल्क नहीं लिया करते थे। जो गुरुकुल की जमीन थी उससे ही उनकी रोजी चलती थी, तथा राजा और धनि व्यक्तियों के द्वारा दिए गए दान से उनका जीवन अच्छे से गुजर जाता था।

सभी छात्र, अपने गुरु का बहुत सम्मान करते थे, तथा उनकी आज्ञा का पालन करते थे। गुरु भी अपने छात्रों को प्यार देते थे। एवं उनको वेद, पुराण, ज्योतिष आदि का पाठ पढ़ाते थे।

एक बार एक गुरुकुल में चार छात्र एक साथ पढ़ते थे। उन सभी को वेद, पुराण एवं दूसरे सभी विषय एक दम कंठस्थ थे। मगर उनका व्यवहारिक ज्ञान बहुत कमजोर था। वे लोग अपने निजी कार्यो को भी वेदो और पुराणों के अनुसार करते थे।

इसलिए उनसे हमेशा गलती हो जाती थी। जिसके कारण, लोग उनका मजाक उड़ाते थे, और उनपे हँसते थे। वे लोग खुद को सुधारने की बहुत कोसिस करते फिर भी असफल ही रहते थे।

पूरे बारह साल की पढाई के बाद वे लोग, सभी विधाओं में निपुण हो गए, और इसके बाद वे लोग अपने गुरु से आज्ञा लेकर अपने घर की ओर चले गए।

रास्ते में चलते चलते वह दोराहे पर पहुंच गए। वे लोग वहां पर खड़े होकर सोचने लगे कि किस रास्ते से जाना उचित है, तभी एक छात्र ने अपनी पुस्तक खोली उसमें लिखा हुआ था – महाजन जिस ओर जाते हैं उसी मार्ग की ओर जाना उचित होता है।

यहां पर उन लोगों ने महाजन का मतलब बहुत सारे लोग समझा। तभी वहां पर बहुत सारे लोग एक शव को जलाने के लिए ले जा रहे थे, चारों छात्रों ने देखा कि इस रास्ते पर बहुत सारे लोग जा रहे हैं, इसलिए वे लोग भी उसी रास्ते पर चले गए।

श्मशान में सभी लोग उस शव का अंतिम संस्कार करने के बाद वहां से चले गए, और यह छात्र वहीं पर रह गए। वे लोग सोचने लगे कि अब आगे क्या करें। तभी एक छात्र ने अपनी पुस्तक निकाली, उस पुस्तक में लिखा हुआ था।

श्मशान में साथ ठहरने वाला ही अपना मित्र होता है। उन्होंने आसपास देखा उन्हें एक गधा दिखाई दिया। वे लोग उस गधे को अपना मित्र समझकर उसे प्यार करने लगे।

तभी वहां पर एक घोड़ा तेजी से दौड़ता हुआ आया, और तीसरी छात्र ने अपनी पुस्तक खोली, उसमें लिखा हुआ था, धर्म की चाल तेज होती है। इतना ही पढ़ते हैं वह लोग उस घोड़े को ही धर्म समझने लगे।

तभी चौथे छात्रों ने सोचा कि क्यों ना मैं भी अपनी बुद्धि माता का परिचय दूं। उसने भी अपनी पुस्तक को खोला और और उसके पुस्तक पर एक जगह लिखा था, कि अपने मित्रों को धर्म से जोड़ना है।

वे लोग गधे को अपना मित्र समझ रहे थे और घोड़े को धर्म। इसलिए वह लोग अपने मित्र को धर्म से जुड़ने के लिए, घोड़े और गधे को एक साथ उनके गले में रस्सी डालकर बांध दिया।

ऐसा करते उनको वहां के स्थानीय लोगों ने देख लिया। वहां के लोगों के इन चारों छात्रों पर बहुत गुस्सा आई। और वह लोग इन छात्रों को मारने के लिए दौड़े। वे छात्र जैसे तैसे अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकले।

भागते हुए रास्ते में उन्हें एक नदी दिखाई दी। वे लोग तैरना नहीं जानते थे इसलिए उन लोगों के सामने नदी पार करने की समस्या उत्पन्न हुई। तभी उनमें से एक छात्र ने अपनी पुस्तक खोली उसमें लिखा हुआ था कि – जो भी पात्र आएगा वह नदी पार कर आएगा।

इतना पढ़ते ही उस छात्र ने नदी की ओर देखा, तभी एक पत्ता नदी के बहाव के साथ बहता हुआ आ रहा था। उस छात्र ने बिना सोचे समझे ही उस पत्ते को पकड़ने के लिए नदी में छलांग लगा दी। उसे तैरना नहीं आता था इस कारण वह नदी के तेज बहाव में बहने लगा।

नदी में अपने साथी साथी को बहते हुए देख, दूसरे छात्र ने अपनी पुस्तक खोली – उसमें लिखा हुआ था। बुद्धिमानी इसी में है की सम्पूर्ण का नाश होते देखकर आधे को बचाले और आधे का त्याग कर दे।

तभी एक छात्र ने नदी में बहते हुए अपने दोस्त के बाल पकड़े और तलवार से उसका सर कलम कर दिया, ताकि उसे आधा तो बचा लिया जाये। इतने में सारे लोग उन छात्रों के पास पहुंचे और उन्हें पकड़कर राजा के पास ले गए।

राजा ने अपने साथी का सर काटने वाले छात्र को मृत्युदंड दिया। और बाकी के छात्रों को कारागार में बंद कर दिया। इसलिए कहा जाता है कि बिना सामाजिक ज्ञान के शिक्षा व्यर्थ है।

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