सियार की पत्नी – Siyar Ki Patni – Interesting Story In Hindi 2022

Siyar Ki Patni

यह कहानी है सियार की पत्नी (Siyar Ki Patni) की दुष्टता के बारे में।  किसी गांव मे एक बहुत सीधा साधा गधा रहता था, उसका कोई परिवार नहीं था। वह अकेले ही अपना जीवन बिताता था। उसे जो भी थोड़ा बहुत खाना मिलता था उसी से अपना पूरा दिन निकाल लेता था।

उस गांव मे जल्दी उसे कोई खाने पीने के लिए नहीं देता था। जब भी वो किसी के दरवाजे पर जाता लोग उसे लाठी डंडे से मार कर भगा देते थे। कभी कभी तो उसे दिनभर भूखा ही रहना पड़ता था।

एक दिन गांव मे एक किसान ने अपने घर मे दावत रखा, और गांव के सभी लोग को बुलाया। उस दिन गांव मे रहने वाले सभी कुत्ते भी बहुत ख़ुश थे की आज तो पेट भर भोजन मिलने वाला है। ये खबर जब गधे की मिली तो वो भी मन ही मन मे खुश हो गया। की आज तो मुझे भी पेट भर खाना मिल जायेगा।

शाम हुई और सभी लोग दावत खाने चल दिए। गधा जब गांव वालो को जाते देखा तो सोचा मै भी इनके पीछे – पीछे छुप के चल देता हूँ। जैसे ही मौका मिलेगा वैसे ही मै अपना खाना खा कर पेट भर लूंगा। और वो उनके पीछे चल दिया। गधा दावत मे पंहुचा गया। जब वो वहाँ पंहुचा तो देखा की भंडार घर मे कोई नहीं था। तो उसने मन मे सोचा चलो यही अच्छा मौका है, जल्दी जल्दी कुछ खा के यहाँ से निकल जाता हूँ।

गधा जैसे ही वहाँ खाने के लिए पंहुचा, गांव के एक आदमी ने उसे देख लिया और उसे लाठी से मार मार के भगा दिया। वह भागता हुआ जंगल की ओर चला गया। उसने जंगल मे बहुत हरी हरी घास देखा ओर उसी को खा कर अपना पेट भर लिया।

गधे को घास इतना स्वादिष्ट लगने लगा की अब रोज रोज उसी को खाने लगा और जंगल मे रहने लगा। गधा दिन रात घास को खाता और आराम से जंगल मे रहता था। वह घास को खाते खाते बहुत ज्यादा मोटा ताज़ा हो गया था, और अपने आप को बहुत ज्यादा शक्तिशाली समझने लगा।

उसी जंगल मे एक सियार अपने पत्नी के साथ रहता था। एक दिन Siyar Ki Patni ने अचानक से गधे को घास खाते हुए देखा। तो उसने सियार से कहा स्वामी ये गधा तो बहुत मोटा ताज़ा लग रहा है। अगर इसका मांस चखने को मिल जाये तो मजा आ जायेगा।

सियान ने कहा – देखो! ये हमलोग से बहुत बलवान लग रहा है अगर मै इसको मारने जाऊ तो कही ये मुझे ही ना मार दे। नहीं नहीं मेरे से ये नहीं होगा। और वैसे भी हमें चूहों और बाकी खाने वाली चीजों की कमी थोड़े न पडती है,  फिर ये व्यर्थ का काम क्यू करना।

और तुम एक कहावत नहीं सुनी हो क्या ? जो कुछ हमारे पास है उसी मे ख़ुश रहना चाहिए ज्यादा लालच करने से जो कुछ भी रहता है और जो तुम पाना चाहते हो वो सब हाथ से निकल जाता है। इसलिए ज्यादा लालच नहीं करना चाहिए।

उसकी पत्नी जब इतनी बात सुनी तो वह उदास हो गयी और बोली, गलती हो गयी मेरे से की मैंने आपको कुछ काम करने को बोला। आप जैसे लोग से अब उम्मीद ही क्या की जा सकती है। इतना कहकर वो  अंदर चली गयी। सियार बोला – ऐसे क्यू बोल रही हो ये इतना शक्तिशाली जानवर है, की एक झटके मुझे मार सकता है। क्या तुम्हे मेरे प्राणों की चिंता नहीं है।

तब उसकी पत्नी रोते हुए बोली – अब मै अच्छी तरह से समझ गयी हूँ। आपको मेरी खुशी का कोई परवाह नहीं है। मेरा तो नसीब ही ख़राब था की आप जैसे प्राणी से मेरा नाता जुडा। दिन दिन भर काम कर के थक जाती हूँ और खाने को क्या मिलता है बस सड़े हुए चूहों का मांस और ऊपर से आपके भी नखरे सहती हूँ। लेकिन आपको इससे क्या मतलब, मै मरू या जियूं ।

स्त्रियों के आंसू ही सबसे बड़ा हथियार होता है, सियार जब अपने पत्नी के आँखो मे आंसू देखा तो वह अपने आप को कोसने लगा की मै  अपने पत्नी के लिए इतना भी नहीं कर सकता हूँ। फिर वो उसके पास गया और बोला – देखो अब रोना बंद करो,  तुम्हारे अलावा इस संसार मे मेरा है ही कौन।(Siyar Ki Patni)

तुम ऐसे गुस्सा हो जाओगी तो कैसे चलेगा तुम बिलकुल भी चिंता मत करो मै अभी उस गधे का मार कर लता हूँ। और आराम से उसका मांस हम लोग खाएंगे। सियार उस गधे को मारने के लिए उसके पीछे चल दिया। वह गधा जिधऱ भी जाता सियार उसके पीछे लगा रहता था।

गधा भी चालक था वो समझ गया था की सियार उसे मारने के चक्कर मे उसके पीछे घूम रहा है। धीरे धीरे कितने साल बीत गए, और सियार बूढा हो गया। और बुरी तरह से थक गया लेकिन वो गधा उसके  हाथ नहीं लगा।

वह सोचने लगा इतने साल बीत गए और मै इस गधे को मार नहीं सका अब अपनी पत्नी को क्या जवाब दूंगा। वो तो और उदास हो जाएगी और क्या पता मुझसे बात भी करेंगी की नहीं। यही सब बात सोच सोच कर और उदास होकर अपने घर वापस चल दिया।

जब वह अपने घर गया तो देखा की उसकी पत्नी किसी दूसरे सियार कर साथ रह रही है और उसके कई संतान भी हो गए थे। यह सब देख कर सियार दुखी हो गया और उससे पूछा ये तुम क्या कर रही हो।

मै तुम्हारे खुशी के लिए वन मे भूखे प्यासे भटकता रहा, न जाने कितने दुखो का सामना किया, सर्दी, गर्मी, बरसात सब सहा और आधा पेट खा के तुम्हारी भूख मिटाना चाहता था की तुम खुश हो जाओ। और तुम यहाँ दूसरे के साथ रह रही हो।

उसकी पत्नी बोली – दुखी क्यो हो रहे हो। तुम्हारे जाने के बाद मेरी तबियत बहुत ख़राब हो गयी थी और इसने मेरी मदद की। मुझे अच्छा और ताज़ा ताज़ा मांस ला कर दिया फिर जाकर मेरी तबियत मे सुधार आया।

तुम्हारे सहारे रहती तो मै कब का मर गयी होती। और मुझे पता था की तुम्हारे जैसे आलसी और निकम्मे प्राणी से ये काम कभी नहीं होगा और तुम मुझे कभी ख़ुश नहीं कर पाओगे। इसलिए मैंने ऐसा किया। और वैसे भी इतने दिन बीत गए तो मुझे लगा की आपको किसी जानवर ने मार दिया होगा।

सियार गुस्से मे बोला – मृत्यु तो तभी हो गयी थी मेरी जब मै यहाँ से तुह्मारी इच्छा को पूरी करने के लिए गया था। लेकिन ये मेरी बहुत बड़ी बेवकूफी थी की मै तुम जैसे चरित्रहीन और लालची औरत को पहचान नहीं पाया।

किसी शास्त्रों मे ठीक ही कहा गया है की स्त्री के चरित्र और उसकी बुद्धि पर जो कोई भरोसा करता है, वह अपना उसी समय से सर्वनाश को बुलावा दे देता है।

ठीक है तुमने जो किया सो किया, अब मै तो यहाँ से जा रहा हूँ, लेकिन एक बात अपने जिंदगी मे हमेशा याद रखना जो पत्नी अपने पति को धोखा देकर किसी दूसरे के साथ अपना जीवन बिताती है।

उसकी इस संसार मे कोई भी इज्जत नहीं करता है। और तुम्हारा भी यही हाल होगा। तुम कभी भी ख़ुश नहीं रहोगी। सियार इतना बोल कर दूसरे जंगल की ओर चल दिया।

सारांश – ” सियार की पत्नी (Siyar Ki Patni) ” इस कहानी से यही शीख मिलती है किसी भी काम को करने के लिए अपनी बुद्धि का उपयोग जरूर करे। किसी के बातो में आकर बिना सोचे समझे काम करने का नतीजा हमेसा गलत होता है।


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