तू डाल-डाल मैं पात पात कहानी | Tu Daal Daal Main Paat Paat | Best Story 2023

इस मुहावरे में, अपने विरोधी की चालो का पहले से अनुमान लगाकर उसे खुद की ही चाल में फंसा देना ही। तू डाल डाल मैं पात पात ( Tu Daal Daal Main Paat Paat ) कहलाता है

“तू डाल-डाल मैं पात पात” मुहावरे में दो चालाक व्यक्तियों की बात होती है, जहां एक व्यक्ति, दूसरे की तुलना में अधिक चालाक होता है। इस मुहावरे में चालाकी और कुशलता की अधिकता को दर्शाया जाता है।

एक व्यक्ति चालाक होने पर दूसरा व्यक्ति अत्यधिक चालाक बताया जाता है, एक व्यक्ति श्रेष्ठ होने पर दूसरा व्यक्ति अति श्रेष्ठ, और एक व्यक्ति उत्तम होने पर दूसरा व्यक्ति अति उत्तम बताया जाता है।

अर्थ: Tu Daal Daal Main Paat Paat

इस मुहावरे का अर्थ है कि दो व्यक्तियों में, एक दूसरे की तुलना में चालाकी या कौशलता में अंतर होता है। यह मुहावरा आमतौर पर परिस्थितियों में प्रयोग होता है, जहां दो व्यक्तियों के बीच उन्नति या कुशलता की तुलना होती है।

यह मुहावरा व्यक्तियों की कौशलता, चालाकी और प्रतिस्पर्धा को बयां करता है और दर्शाता है कि एक व्यक्ति कितना अधिक चालाक, श्रेष्ठ और उत्तम हो सकता है।

यह मुहावरा हमें सीख देता है कि अगर हम अपनी कौशलता और कार्यों में मेहनत करें, तो हम दूसरों से उच्चतर स्तर पर पहुंच सकते हैं। हमें आत्मविश्वास रखना चाहिए और निरंतर प्रयास करना चाहिए ताकि हम सदैव प्रगति करते रहें और अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें।

कहानी: Tu Daal Daal Main Paat Paat

एक शहर में एक बहुत ही अमित सेठ रहता था, उसके पास धन दौलत की कोई भी कमी नहीं थी। उसका भंडार धन – दौलत और अनाजों से भरा हुआ रहता था। मगर वह सेठ बहुत ज्यादा ही कंजूस था।

जरूरत के कामों में भी वह, पैसा खर्चा नहीं करता था। एक बार उसके बिजनेस में, उसे घाटा होने वाला था। यह बात वह अच्छे से समझ गया था, कि वह कुछ भी कर ले मगर यह नुकसान उसे झेलना ही पड़ेगा।

इससे बचने के लिए वह भगवान से प्रार्थना करता है की अगर उसका नुकसान नहीं हुआ तो वह, ब्राह्मण को खाना खिलाएगा। ऊपर वाले की कृपा से उसके बिजनेस में घाटे की जगह मुनाफा हो गया।

अब सेठ की पत्नी उसे रोज टोकती रहती कि, आप कब किसी ब्राह्मण को खाना खिलाएंगे। मगर सेठ इस बात को हमेशा टालता रहता था, कि हाँ समय आने पर खिला दूंगा।

काफी दिन बीत गए, सेठानी के बार बार टोकने पर आखिरकार सेठ ब्राह्मण को खाना खिलाने के लिए राजी हो गया। बस फिर क्या था, अब सेठ ऐसा ब्राम्हण ढूंढ़ रहा था, जो बहुत कम खाना खता हो।

पर उसे जो भी ब्राम्हण मिलता, वह उससे पूछता, तुम कितना खाना कहते हो, हर कोई ज्यादा ही खाने के लिए कहता। उन ब्राह्मणों की भोजन करने की क्षमता सुनकर सेठ जी के होश उड़ जाते थे। इस कारण से सेठ जी ने किसी भी ब्राह्मण को भोजन करने का निमंत्रण नहीं दिया।

उसी शहर में एक पंडित जी रहा करते थे। जब उन्हें यह बात पता चली की कंजूस सेठ, ब्राह्मणों से उनके भोजन के बारे में पूछ रहे, तो पंडित जी ने सेठ को मजा चखाने का सोचा। और पंडित जी अगले ही दिन सेठ के घर पहुंच गए।

सेठ ने, पंडित जी से भी पूछा की आप कितना भोजन करते हैं। भोजन का नाम सुनते ही पंडित जी ने कान पकड़ते हुए कहा ! अरे भोजन का नाम मत लीजिए सेठ जी। मैं तो भोजन का नाम सुनते ही डर जाता हूं।

पूरे दिन भर में एक दो चम्मच खाना खा लिया, वही मेरे लिए बहुत ज्यादा हो जाता है। यह सुनकर सेठ जी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने अगले ही दिन पंडित जी को अपने घर भोजन करने के लिए निमंत्रण दे दिया।

पंडित जी पहले तो मना करते रहे थे, मगर सेठ के बार-बार आग्रह करने पर पंडित जी भोजन करने के लिए राजी हो गए। अगले दिन सेठ ने  सेठानी को, यह कह के अपने काम में चले गए, कि पंडित जी आएंगे भोजन करने के लिए, तो उन्हें जो भी चाहिए नहीं खाने के लिए दे देना।

दोपहर को, पंडित जी भोजन करने आए सेठानी ने पंडित जी से पूछा, कि आप क्या खाएंगे। तो पंडित जी ने 56 प्रकार के भोग मंगवा लिए। जब सेठानी ने भोजन लाया, तो पंडित जी ने पेट भर भोजन किया और जो शेष बचा उसे घर के लिए बांध लिया।

भोजन करने के बाद दक्षिणा के तौर पर सेठानी से ₹101 लिए और अपने घर चले गए। जब शाम को सेठ वापस घर आया। तो उसने सेठानी से पंडित के भोजन के बारे में पूछा। (Tu Daal Daal Main Paat Paat)

सेठानी ने उसे बताया कि पंडित जी ने 56 प्रकार के भोजन खाए और दक्षिणा के तौर पर ₹101 लेकर गए हैं। इतना सुनते ही सेठ बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा। थोड़ी देर बाद जब उसे होश आया, तो वह गुस्से में पंडित जी की घर की ओर चल पड़ा।

इधर पंडित जी ने भी सेठ के आने की पूरी तैयारी करके रखी थी। क्योंकि वह अच्छी तरीके से जानते थे, कि जब यह बात सेठ को पता चलेगी तो सेठ चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने अपनी पंडिताइन को सारा माजरा समझा दिया था।

और सेठ के आते ही पलंग पर, बिस्तर ओढ़कर लेट गए। सेठ जी जैसे ही दरवाजे पर आए, वैसे ही पंडिताइन जोर-जोर से अपना छाती पीट के रोने लगी, और कहने लगी, कि किस पापी सेठ के यहां भोजन करने गए थे।

पता नहीं क्या खिला दिया मेरे पति को। कहीं जहर तो नहीं दे दिया। उस सेठ का कभी भला ना हो। मैं पुलिस थाने जाऊंगी। उसके खिलाफ रिपोर्ट लिखउगी। उसे मैं चैन से जीने नहीं दूंगा।

पंडिताइन के मुंह से पुलिस थाने की बात सुनकर शेठ जी डर गए, और पंडिताइन के सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए। फिर सेठ ने पंडिताइन से कहा आप घबराइए मत, धीरज रखिए। किसी अच्छे वैद को दिखाइए पंडित जी जरूर ठीक हो जाएंगे।

तब पंडिताइन ने कहा वैद को कैसे दिखाऊ, मेरे पास तो बिल्कुल भी पैसे नहीं है। तभी अगल बगल वाले भी आ गए और उन्होंने भी सेट को बुरा भला कहते हुए पंडित जी के उपचार के लिए ₹500 देने को कहा।

₹500 का नाम सुनते सेट को धक्का लगा। मगर पड़ोसियों के बोलने से कि अगर पैसे नहीं दिए तो पुलिस को बुलाएंगे। सेठ जी ने मजबूरी में ₹500 दिए। और अपनी जान छुड़ाकर वहां से घर वापस आ गए। इस तरह पंडित जी ने सेठ की कंजूसी का अपनी चालाकी से जवाब दिया इसे ही कहा जाता है तू डाल डाल मैं पात पात ( Tu Daal Daal Main Paat Paat )


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